चाणक्य नीति के टॉप 12 कथन | BEST CHANAKYA NEETI QUOTES IN HINDI

Best chanakya neeti quotes in hindi | हिंदुस्तान ने अपनी धरती पर अनेक महात्मां, संत, विचारक और ज्ञानी मनुष्यों को जन्म दिया है जिनमे एक हें महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य. उनके द्वारा रचित “चाणक्य नीति” नामक ग्रन्थ मानव को जीवन राह दिखाता है. चाणक्य नीति में कही गयी बातें एक सामान्य मानव के जीवन में आने वाली कठिनायों और उनके हल को बिल्कुल सजीव ढंग से बयान करती है. हिन्दीवाल आप आपको आचार्य चाणक्य रचित “चाणक्य नीति” ग्रन्थ में से 12 सबसे बेहतरीन कथन बताने जा रहा है. इस लेख में हम आपको चाणक्य नीति (chanakya neeti hindi) की चुनिन्दा बातों को आज के समाज के हिसाब से समझाने की कोसिश करेंगे. (Chanakya niti in hindi)

CHANAKYA NEETI QUOTES IN HINDI

चाणक्य नीति के टॉप 12 कथन

BEST CHANAKYA NEETI QUOTES IN HINDI

ऐसे मित्रों और लोगों से बचो, जो सामने तो मीठी- मीठी बातें करते हो मगर पीठ-पीछे आपको बर्बाद करने की योजना बना रहे हों. ऐसे लोग उस घड़े की तरह है जिस के ऊपर तो दूध की परत होती है मगर अन्दर बिष से भरा होता है. चाणक्य नीति (Chanakya Neeti)

डर को नजदीक ना आने दो, अगर नजदीक आये तो उस पर विजय प्राप्त करने के विश्वास के साथ आकर्मण कर दो. डर से भागो मत डटकर मुकाबला करो. चाणक्य नीति (Chanakya Neeti)

Chanakya Niti in Hindi

एसा इंसान जो ताक़त ना होते हुवे भी दिल से हार नहीं मानता, दुनिया की कोई ताक़त उसे हरा नहीं सकती. चाणक्य नीति (Chanakya Neeti)

अपनी संतान को आरम्भ के 5 वर्ष तक बहुत प्यार करो. उसके बाद से 15 वर्ष की आयु होने तक उसे कठोर अनुशाशन में रखो . 16 वर्ष की आयु में बाद उसके साथ दोस्त की तरह रहो और व्यहार करो.   चाणक्य नीति (Chanakya Neeti)

Chanayak Neeti In Hindi

बीती हुवी बाते अगर गलत भी है, आपने अपने भूतकाल में कुछ गलत भी किया है तो उसके बारे में सोचकर अपना वर्तमान ख़राब ना करे. उससे सीख लेते हुवे, अपने वर्तमान को सही तरीके से जीने की कोशिस करे. चाणक्य नीति (Chankya Neeti)

जो इंसान गलत कर्म करने वाले, दुराचारी, और कुद्रष्टि रखने वाले व्यक्ति से मित्रता या नजदीकी रखता है, उसका नाश होना तय है. चाणक्य नीति (Chanakya Neeti)

जो लोग आपनी दौलत, घर-बार और भगवान् का दिया हुवा अपने हिस्से का सुख भोग कर संतुष्ट नहीं हुवे वो मरने तक संतुष्ट नहीं हो सकते. ऐसे कई लोग पहले भी मर चुके है और आगे भी मरेंगे. चाणक्य नीति (Chanakya Neeti)

जिसका ज्ञान किताबों तक सिमट गया और जिसने अपने दौलत किसी और के सुपुर्द कर दी, वह जरुरत पड़ने पर मदद नहीं कर सकते. चाणक्य नीति (Chanakya Neeti)

Chanakya niti hindi me

कोई सर्प विष वाला ना हो तो भी उसे बिषधर दिखना जरुरी है, अगर वो डंक ना दे पाए तो भी कोई बात नहीं, मगर उसे अपने विषैले डंक का झूठा ही प्रदर्शन करते रहना चाहिए ताकि लोग उसकी कमजोरी का फायदा उठाने के बारे में ना सोचें. चाणक्य नीति (Chanakya Neeti)

निर्धनता के समय अपने मित्रों से और सम्पन्नता की समय अभिमान से दूर रहना चाहिए. चाणक्य नीति (Chanakya Niti)

हमारा शरीर नाशवान है, हमारा धन चलायमान है. मुर्त्यु एकदम निकट है, अतः तुरंत कुछ अच्छा काम करो. चाणक्य नीति (Chanakya Niti)

दूसरों की गलतियों से ना सीखने वाले इंसान की उम्र ,कुछ कर गुजरने के लिए कम पड़ जाती है. चाणक्य नीति (Chankya Neeti)

Best chanakya neeti quotes in hindi By HindiWall

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आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना | लाभ | पात्रता | AYUSHMAN BHARAT HEALTH SCHEME

Ayushman Bharat Yojana Health Scheme In Hindi |

महत्वाकाक्षी आयुष्मान भारत योजना एक सरकारी नियंत्रण वाली स्वास्थ्य बीमा योजना है. इस योजना के तहत देश भर के लगभग 10 करोड़ गरीब और वंचित परिवारों के लोगों की बिमारियों के ईलाज की व्यवस्था की गई है.

गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले लोगों, दिव्यांग, गरीब मजदूरों और आर्थिक तौर पर कमजोर ग्रामीणों को इस योजना के तहत लिया गया है. इस योजना (Ayushman Bharat Yojana) के तहत रजिस्ट्रेसन कर लेने के बाद आप को हर साल एक निच्शित राशी प्रीमियम के तौर पर भुगतान करनी होगी. जिसके बाद आप देश भर के अनेक सरकारी और निजी अस्पतालों (वेलनेस सेंटरों ) में अपना और अपने परिवार के सदस्यों का 5 लाख तक का अपना ईलाज मुफ्त करवा सकते है. (Ayushman Bharat Yojana Health Scheme In Hindi)

यही नहीं देश भर में स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत सुधारने के लिए भी इस योजना (Ayushman Bharat Scheme) में अनेकों प्रावधान किये गये है. जिसके तहत नए मेडिकल कॉलेज खोलना, पुराने अस्पतालों में नयी तकनीकी की व्यवस्था करना आदि है. 2018 के बजट में इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए बाकायदा बजट का इंतजाम भी किया जा चुका है. 15 अगस्त 2018 से आयुष्मान भारत योजना के शुरू हो जाने की घोषणा की उम्मीद की जा रही है.

Ayushman bharat health insurance scheme in hindi

AYUSHMAN BHARAT HEALTH SCHEME
Image source mygov

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना खास तथ्य

योजना का नाम          :   आयुष्मान भारत योजना

घोषणा की दिनांक       :   01 फ़रवरी 2018

लागू होने की दिनांक    :  15 अगस्त 2018

आयुष्मान भारत योजना का लाभ लेने हेतु पात्रता 

(AYUSHMAN BHARAT YOJANA ELIGIBILITY)

आयुष्मान भारत स्कीम भारत के पिछड़े, गरीब और दिव्यांग लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है. इस महत्वाकांछी योजना की पात्रता के लिए  2011 की जनगणना यानि कि SECC-2011 को आधार माना गया है. इस जनगणना के आधार पर चुने गये बी. पी. एल. धारकों सहित ऐसे लोग जिनके पास ग्रामीण छेत्र में अपना घर नहीं है, रोजमर्रा के मजदूर परिवारों के सदस्यों और विकलांगों को इस योजना हेतु पात्र माना गया है.

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना के लिए जरुरी कागजाद

(DOCUMENTS FOR AYUSHMAN BHARAT YOJNA)

यद्धपि आधाकारिक तौर पर अभी तक इस आशय कोई सरकारी आदेश नहीं निकला है. फिर भी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा योजना में आवेदन हेतु कुछ जरुरी दस्तावेज चाहिए होंगे. जैसे कि आधार कार्ड, इनकम प्रमाण, फोटो, बैंक अकाउंट आदि की जरुरत होगी.

        "आयुष्मान भारत" | AYUSHMAN BHARAT HEALTH SCHEME - POSTED BY HINDIWALL

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना हेतु आवेदन कैसे करें.

(HOW TO APPLY FOR AYUSHMAN BHARAT SCHEME)

आयुष्मान भारत योजना में रजिस्ट्रेसन हेतु अभी तक सरकार द्वारा कोई औपचारिक प्रबंध नहीं किया गया है. मगर माना जा रहा है की सरकारी पोर्टल के जरिये ऑनलाइन आवेदन मांगे जायेंगे. जैसे ही इस सम्बन्ध में कोई खबर आएगी तो हिन्दीवाल की टीम इस लेख को अपडेट कर आपको जानकारी देगी.

आयुष्मान भारत योजना का प्रीमियम

(AYUSHMAN BHARAT HEALTH INSURANCE SCHEME PREMIUM)

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के खर्चे का प्रावधान सरकार ने बजट में कर दिया है. इस योजना के खर्च में अधिकतर हिस्सा सरकार की तरफ से दिया जायेगा. सालाना प्रीमियम लगभग 1000 से 1500 के मध्य होगा. जिससे, आपको और आपके पूरे परिवार को सालाना 5 लाख का स्यस्थ्य बीमा कवर दिया जायेगा. (Ayushman Bharat Yojana Health Scheme In Hindi)

Ayushman Bharat Health Scheme

Ayushman Bharat Yojana Helpline :1800-180-1104

आयुष्मान भारत योजना के अन्य लाभ.

(BENEFIT OF AYUSHMAN BHARAT HEALTH SCHEME)

  • ऐसे गरीब परिवार, जिनके पास कोई स्वाथ्य बीमा नहीं है और अपनी बीमारी का ईलाज करवाने में समर्थ नहीं है उन्हें इस बीमा योजना का लाभ दिया गया है.
  • आयुष्मान बीमा योजना में परिवार के सदस्यों की संख्या 5 मानी गयी है, हालाँकि बाकि सदस्यों को भी इस योजना के तहत कवर देने की बात की जा रही है
  • गरीब और कमज़ोर परिवारों के गंभीर बीमार सदस्यों को आर्थिक सहायता के रूप में मासिक धनराशी प्रदान करने की व्यवस्था भी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत की गई है.

“Ayushman Bharat Yojana Health Scheme In Hindi”  By – HindiWall

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प्रेरणादायक अनमोल वचन और सुविचार | INSPIRATIONAL THOUGHTS IN HINDI (SUVICHAR)

Best Motivational Quotes Thoughts Suvichar In Hindi | प्रेरणादायक सुविचार जीवन में उसी तरह कार्य करते है जिस तरह सूखे में बारिश. दुनिया भर के अनोकों महान सफल इंसानों ने अपने महान जीवन- अनुभवों के आधार पर अनके सूक्तियों और सुविचारों को जन्म दिया. इन्ही सुविचारों और अनमोल वचनों में से कुछ अच्छे विचार प्रस्तुत है.

Neem Karoli Baba Quotes In Hindi

(नीम करोली महाराज के महान विचार)

वासना, लालच, क्रोध, अनुलग्नक ये नरक के सभी रास्ते हैं.

भगवान् को अपने दिल में इस तरह से रखो, जैसे आप बैंक में अपना धन रखते हो.

मैं कुछ नहीं चाहता हूँ सिवाय इसके मैं किसी की सेवा कर सकूँ.

जो मांगना है भगवान से मांगो, मैं एक सामान्य मानव हूँ. मैं कुछ नहीं कर सकता.

आपको अपने गुरु से मिलने के लिए कही जाने की जरुरत नहीं है. वह आपके अंदर है, कही बाहर नहीं.

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Srimad Bhagwat Geeta Thoughts In Hindi

(श्रीमद गीता भागवत से कुछ महान विचार)

कर्म करो फल की चिंता मत करो.

जो इन्सान अपने मन को नियंत्रित नहीं कर सकता, उसका मन उसके लिए एक शत्रु की भाति कार्य करता है.

क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जा है, जब तर्क नष्ट होता है तब इन्सान का पतन हो जाता है. 

आत्मज्ञान की तलवार से काटकर अपने मन से अज्ञान के संदेह को अलग कर दो, अनुशाषित रहो, उठो.

जो लोग अध्यात्मिक ज्ञान और जागरूकता के शिखर तक पहुच चुके है, उनका मार्ग निःस्वार्थ कर्म है. और जो भगवन को प्राप्त है वो स्थिर ओर शांत है.

तुम उसके लिए शोक करते हो जो शोक करने योग्य ही नहीं है. बुद्दिमान व्यक्ति न जीवित और न ही मर चुके के लिए शोक करता है. यही जीवन जागरूकता ज्ञान भी  है.

Swami Vivekananda Quotes In Hindi

(स्वामी विवेकानंद के कथन)

उठो जागो और जब तक अपने लक्ष्य प्राप्त न कर लो ठहरो मत. 

ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं. वो हम ही है जो अपनी आखो में पट्टी बांध लेते है और फिर रोते है कि कितना अन्धकार है.

खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है. अपनी ताक़त समझ लेना सबसे बड़ा ज्ञान.

जब तक मैं जीवित हूँ तब तक मैं सीखता हूँ. वह व्यक्ति जो कुछ सीखना नहीं चाहता वह पहले से ही मरे हुवे के सामान है.

शक्ति जीवन है, निर्बलता मौत है. विस्तार जीवन है, संकुचन मौत है, प्रेम जीवन है द्वेष मौत है.

Swami Vivekananda Ke Vichar

Osho Quotes In Hindi

(संत ओशो के विचार)

कोई चुनाव मत कीजिये, जीवन को ऐसे अपनाइए जैसे कि वो अपनी समग्रता में है . 

जब प्यार ओर नफरत दोनों ही न हों तो हर चीज साफ़ और स्पष्ट हो जाती है.

मूर्ख दूसरों पर हंसते हैं और बुद्दिमान खुद पर.

सवाल ये नहीं है कि कितना सीखा जा सकता है, सवाल ये है कि कितना भुलाया जा सकता.

आत्मज्ञान एक समझ है कोई उपलब्धि नहीं, ये मंजिल नहीं है ये जीवन पथ का ज्ञान है.

अगर में कहता हूँ, आप खुद ही देवी –देवता है तो इसका मतलब यह है कि, आपमें असीम सम्भावनाये है, आपकी छमता अंनंत है.

Steve Jobs Quotes And Thoughts in Hindi

(स्टीव जॉब्स के विचार)

जब आप समुन्द्री डाकू बन सकते है तो फिर नौसेना में जाने की क्या जरुरत  है.

अपनी छमता के बल पर दुनिया को बताओ कि आप कौन हो, तभी दुनिया आपको पहचानेगी.

जीवन हर पल डॉट्स की तरह है, जिन्हें आप भविष्य के लिए जोड़ नहीं सकते. समय के बीत जाने के बाद जब आप पीछे मुड़कर अपने भूतकाल देखेंगे तो आपको ये डॉट्स जुड़े हुवे नजर आयेंगे.

जो लोग ये सोच कर पागल होते है कि वो दुनिया को बदल सकते है, वही लोग ये कर भी सकते है कोई और नहीं.

कब्रिस्थान में सबसे अमीर आदमी बनकर सजना मेरे लिए महत्वपूर्ण बात नहीं है. रात को बिस्तर पर जाकर ये सोच आना कि आज मैंने अच्छा काम किया ये मेरे लिए बड़ी और महत्वपूर्ण बात है.

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Shiv Khera Quotes And Thoughts In Hindi

(शिव खेड़ा के प्रेरक कथन)

प्रेरणा एक एक आग की तरह है, जिसे जलाये रखने के लिए लगातार इधन की आवश्यकता होती है. प्रेरणा की आग का इधन आपका खुद पर विश्वास है.

विपरीत परिस्थिति में कुछ लोग टूट जाते है जबकि कुछ लोग रिकार्ड तोड़ते है. 

सफल लोग कोई अलग काम नहीं करते वो बस हर काम अलग तरीके से करते है.  

आपको अगर ये लगता है कि आप कर सकते है तो आप कर सकते है, मगर यदि आपको लगता है कि आप नहीं कर सकते आप नहीं कर सकते. आप दोनूं ही सूरत में सही होते है.

अगर आप समाधान का हिस्सा नहीं है तो आप ही समस्या है.

आप जितनी बहसें जीतते है, उतने मित्र खो देते है.

आपका विजन अपने अद्रश्य भविष्य को देखने की काबिलियत है. यदि आप अद्रश्य को देख पा रहे है तो आप असंभव को भी संभव कर सकते है.                 

Best Motivational Quotes Thoughts Suvichar In Hindi

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(अन्य हिंदी प्रेरणादायक कथन)

कर्म से भाग्य की रेखाएं बदली जा सकती है, कर्म भाग्य के अधीन नहीं है.

आपका भाग्य आपके कर्म और सोच का गुणांक होता है. 

लगातार और सही रस्ते पर कर्म करते रहने से ही जीवन के वास्तविक लक्ष्य की प्राप्ति संभव है.

हम सभी के पास सामान अवसर नहीं हो सकते मगर इच्छाशक्ति के बलबूते कोई भी इन्सान महान से महान मंजिल प्राप्त कर सकता है.

दृढ इच्छाशक्ति के साथ बस शुरुवात कर देने भर से ही आप अपनी मंजिल के आधे रस्ते में होते है.

अच्छे विचार अच्छे कर्मो के सहारे ही आ सकते है.

जीवन एक संघर्ष है परन्तु धैर्य और साहस जैसे गुणों के साथ इसे एक महान यात्रा में बदला जा सकता है.

नित नूतन की खोज में रहना ही जीवन यात्रा में रोमांच भरता है.

इस दुनिया में हर काम एक खेल है, जीवन भी एक खेल ही है. हर खेल एक बार ख़त्म हो जाता है, जीवन को एक खेल की तरह जीना और जीते हुवे मौत को याद रखना यही सत-जीवन ज्ञान है.

ज्ञान सफलता की कुंजी है. मगर सत्ज्ञान ही वास्तविक सफलता की तरफ ले जा सकता है.

सत्ज्ञान आपको भीड़ से अलग रखता है, और वैकल्पिक रास्ते दिखाता है.

सत्ज्ञान सुन्दरता ओर यौवन को परास्त कर देता है, ज्ञान ही हर जगह और हर उम्र में सम्मान की गारंटी है.

किसी की निंदा, उसका चरित्र बताने से पहले आपका चरित्र तय कर देती है.

निंदनीय होना निंदक होने से बेहतर है.

प्रेम इन्सान को ऊँचा उठाता है, सही रास्ते और मंजिल की तरफ ले जाता है.

प्रेम ही कुदरत की एक एसी नेमत है जो इन्सान ही नहीं बल्कि समस्त प्राणी- जगत के जन्म, प्रगति ओर सफलता के लिए लगातार उत्तरदायी है.

सत-चरित्र का निर्माण ही प्यार की मंजिल है.

प्रेम,दया और क्षमादान ये भावनाए किसी आदमी के अन्दर इन्सान होने का संकेत है.

आदमी से इन्सान बनने का सफ़र ही जीवन है.

लाखों लोग हर दिन पैदा होते और मरते है. पैदा होना ओर मरना कोई बड़ी बात नहीं है, जीवन को वास्तव में जीना बड़ी बात है.

हर बच्चा जो धरती में पैदा होता है, अपने साथ अपार संभावनाओं को लाता है परन्तु दुनिया में खो जाने की वजह से ही वह उन्हें भुना नहीं पाता.

जो आप करने से डरते है वो करिए ओर हमेशा करते रहिये, यही जीत का सूत्र है.

आपका नजरिया ही आपकी नजर का नंबर तय करता है. 

मेहनत से इन्सान का चहुमुखी विकास होता है, चाहे वह किसी भी काम में क्यों न हो.

जो लोग सपने देखते है ओर उनकी कीमत मेहनत से चुकाने को तैयार रहते है, मंजिल उनको मिलती है. 

Best Motivational Quotes,Thoughts, Suvichar In Hindi | Collected By HindiWall

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मुनस्यारी | पर्यटन, इतिहास | कैसे पहुंचे | MUNSIYARI UTTARAKHAND

Munsiyari Uttarakhand India | घूमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिए मुनस्यारी एक बेहतरीन मंजिल के खूबसूरत पड़ाव की तरह है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित यह छोटा सा पर्वतीय शहर अपने आप में अनेकों विशेषताओं को समेटे हुवे है. चारों ओर से पर्वतों से घिरा हुवा यह शहर दो तरफ से अन्तरास्ट्रीय सीमाओं से भी घिरा हुवा है. सामने पंचाचूली पर्वत, बाई तरफ नंदा देवी ओर त्रिशूल दाई तरफ डानाधार तथा पीछे की तरफ खलिया टॉप मुनस्यारी शहर की खूबसूरती में चार चाँद लगाते है. मुनस्यारी की नेपाल ओर तिब्बत के साथ अन्तरास्ट्रीय सीमायें लगती है. खूबसूरत बुग्याल घूमने के शौकीन पर्यटकों, माउंटेनियरिंग और ट्रैकिंग के शौकीन व्यक्तियों के लिए मुनस्यारी एक अच्छा विकल्प हो सकता है.

स्थिति (Munsiyari Uttarakhand)

समुन्द्र तल से 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मुनस्यारी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है. मुनस्यारी नगर नैनीताल जिले में स्थित काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 295 किलोमीटर तथा पंतनगर एअरपोर्ट से 330 किलोमीटर दूर स्थित है. दिल्ली से मुनस्यारी की दूरी लगभग 600 किलोमीटर है.

एतिहासिक महत्व (History )

पैराणिक द्रष्टि से भी मुनस्यारी एक मत्वपूर्ण स्थल है. कहा जाता है कि पांडवों ने यही से स्वर्गारोहण की शुरुवात की थी. द्रौपती ने पांच पांडवों के स्वर्गारोहण से पहले यही पर अंतिम बार भोजन बनाया था, माना जाता है की पंचाचूली पर्वत के पांच शिखर इसी बात को दर्शाते है.

Munsiyari Uttarakhand गौरीगंगा नदी के साथ- साथ मिलम तक फैला हुवा यह इलाका एतिहासिक तौर पर भी काफी महत्वपूर्ण है.  मुख्य मुनस्यारी शहर कभी भारत-तिब्बत व्यपार का केंद्र बिंदु रहा है. 1962 भारत- चीन युद्द के पूर्व यहाँ  व्यपार काफी सम्रद्द हुवा करता था. यहाँ के मुख्य निवासी शौका और भोटिया जनजाति के लोग आर्थिक तौर भारत- तिब्बत व्यपार के ऊपर निर्भर थे. परन्तु युद्ध के बाद की बदली परिस्थियों और सीमा के बंद हो जाने के कारण व्यापारिक गतिविधिया ख़त्म हो गई.

क्यों जाएँ मुनस्यारी (Tour Munsiyari India) 

मुनस्यारी के सम्पूर्ण क्षेत्र को कुदरत ने बहुत ही खूबसूरत नेमतों से नवाजा है. सुखद शांति और अनछुई प्राकर्तिक छटा का ऐसा सम्मिलन मुनस्यारी के आलावा हिंदुस्तान में शायद ही कहीं और होगा. अगर आप शांत-चित्त घुम्मकड़ है तो आपको मुनस्यारी जरूर जाना चाहिए.

Hill Station Munsiyari | मुनस्यारी प्राकर्तिक निर्मलता का भंडार होने के साथ- साथ अपनी कठिन पर्वतीय संरचना के लिए भी जाना जाता है. अपनी इसी अक्खड़ और कठिन भौगोलिक संरचना के कारण मुनस्यारी साहसिक पर्यटन का केंद्र भी है. यह स्थान नामिक ग्लेशियर, मिलम ग्लेशियर, रालम ग्लेसियर के लिए ट्रैकिंग के साथ- साथ पंचाचूली और नंदा-देवी आदि पर पर्वतारोहन का प्रारंभिक स्थल भी है.

Beautiful Munsyari | अगर आप खूबसूरत फूलों और अलग-अलग किस्म के देशी-विदेशी पक्षियों के बीच कुछ समय बिताना चाहते है, जैव विविधता और प्राकर्तिक सामजस्य को समझने और एक अलग किस्म के परस्थितिक माहौल में घूमना पसंद करते है तो मुनस्यारी जाये, आपको पर्यटन स्थल के चुनाव पर गर्व होगा.


मुनस्यारी के घूमने योग्य स्थान (Place to visit)

  • बिर्थी फाल (Birthi Fall Munsiyari)- विर्थी फाल तेजम से 14 किलोमीटर दूर मुख्य थल-मुनस्यारी रोड पर स्थित एक बहुत बड़ा और खूबसूरत झरना है. घने जंगलों के बीच स्थित इस झरने से हिमालय पर्वतों के विहंगम दृश्य को देखा जा सकता है. विर्थी फाल की प्राकर्तिक छठा को देखने हर साल यह हजारों देशी-विदेशी पर्यटक आते है. मुनस्यारी से विर्थी फाल की दूरी लगभग ३४ किलोमीटर है. खूबसूरत स्थल “मदकोट गाँव” जाते या आते हुवे भी आप विर्थी फाल जा सकते है. कालामुनी पास से १७ किलोमीटर की यात्रा तय करने के बाद आप विर्थी फाल पहुचेंगे.
  • कालामुनी मंदिर (Kalamuni Top/Temple Munsiyari)– मुनस्यारी यात्रा में कालामुनी मंदिर का खासा महत्व है. यह मंदिर आपकी यात्रा को धार्मिक स्पर्श देता है. देवी कलिका को समर्पित इस मंदिर में आप कलामुनी बाबा की मूर्ति के आलावा देवी- देवताओं के पुराने चिन्ह देख सकते है. कालामुनी मंदिर समुन्द्र तल से लगभग 9500 फीट की ऊंचाई स्थित है. चित्त-शांति और धनात्मक अध्यात्मिक शक्ति के लिए यह बेहतरीन स्थल है साथ ही यहाँ से विहंगम पंचाचूली के दर्शन भी किये जा सकते है. विर्थी फाल आते या जाते हुवे भी आप कालामुनी मंदिर जा सकते है. मुनस्यारी से विर्थी फाल की दूरी लगभग १४ किलोमीटर है. आप बस, टैक्सी या फिर निजी वाहन से कालामुनी मंदिर की यात्रा कर सकते है.
  • माहेश्वरी कुंड (Maheshwari Kund Munsiyari)- माहेश्वरी कुंड मुनस्यारी शहर से थोड़ी ही दूर मुनस्यारी मदकोट रोड पर स्थित है. माहेश्वरी कुंड बड़े पैराणिक महत्व का एक खूबसूरत तालाब है. कहा जाता है कि कभी यक्ष यहाँ निवास किया करते थे. यक्ष को यहीं की एक बालिका से प्रेम हो गया था, मगर गाँव वालों ने उनकी शादी नहीं होने दी तथा  यक्ष के रहने के स्थान पर पानी को भी सुखा दिया गया. यह देखकर यक्ष नाराज हुवे और उन्होंने गाँव वालों को श्राप दिया कि पूरे गाँव में सूखा पड़ जायेगा. इसी कारण अनेकों वर्षों तक सूखे की मार झेलने पर गाँव वालों ने यक्ष से माफ़ी मांगी तो सूखा ख़त्म हुवा. मुनस्यारी के बहुत नजदीक होने के कारण आप मुनस्यारी से बहुत कम समय में माहेश्वरी कुंड पहुंच सकते है.
  • थामरी कुंड (Thamri Kund Munsiyari)–  मुनस्यारी से 10 किलोमीटर पहले घने जंगलों के बीच स्थित थामरी कुंड एक सुंदर तालाब है. इस तालाब का भी धार्मिक महत्त्व है. कभी जब बारिस कम होती है तो स्थानीय लोग थामरी कुंड पहुच कर बारिस के लिए पूजा- पाठ करते है. थामरी कुंड अपने अन्दर समेटी हुवी शांति और स्वछंदता के कारण ट्रैकरों और पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र है. यहाँ से बर्फ में ढके हुवे हिमालयी पर्वतों का विहंगम दृश्य साफ़ देखा जा सकता है. यह स्थान भी मुनस्यारी- मदकोट रोड पर पड़ता है. बस, टैक्सी या फिर निजी वाहन थामरी कुंड यात्रा के लिए उत्तम है.
  • नंदा देवी मंदिर (Nanda Devi Temple Munsiyari)– समुन्द्र तल  से 7500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मुनस्यारी का नंदा देवी मंदिर मुख्य मुनस्यारी शहर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर है. आकार में छोटा यह मंदिर, मान्यता के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण है. न सिर्फ स्थानीय बल्कि बाहरी पर्यटक भी यहाँ खूब आते है. हिमालय के खूबसूरत दृश्य देखने एवं पंचाचूली पर्वत के दर्शन के लिए यह स्थान मुनस्यारी में सबसे अच्छे स्थलों में से एक है. मुनस्यारी- मदकोट रोड पर मुनस्यारी से तीन कीलोमीर यात्रा के बाद मुख्य सड़क से लगभग 200 मीटर के पैदल ट्रैक पार करके नंदा देवी मंदिर पहुचा जा सकता है.
munsiyari
  • पंचाचूली शिखर (Panchachuli Peak Munsiyari)– पंचाचूली पर्वत मुनस्यारी के प्रमुख आकर्षणों में से एक है. पांच शिखरों से मिलकर बना यह पर्वत पैराणिक महत्व तो रखता ही है, साथ ही साहसिक पर्यटन के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है. 6334 मीटर से लेकर 6904 मीटर तक ऊँची ये पांच बर्फ से ढकी हुवी चोटियां पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर खीचती है. पिथौरागढ़ पंचाचूली पर्वत बेस की दूरी लगभग 138 किलोमीटर है. पूर्व की तरफ से सोना ग्लेशियर तथा पच्शिम की तरफ से उत्तरी बालती ग्लेशियर होते हुवे पर्वतारोही पंचाचूली शिखर की यात्रा करते है.
  • मुनस्यारी संग्रहालय (Tribal Heritage Museum Munsiyari)–  मुनस्यारी एक ट्राइबल बाहुल्य इलाका है. यहाँ के ट्राइबल सास्कृतिक तौर पर काफी ऊँचे दर्जे के लोग है. ये लोग अपनी जीवन शैली ओर विरासत को बचाकर रखना अपनी शान समझते है, ट्राइबल हैरिटेज म्यूजियम इन ट्राइबल लोगों के इसी शान का एक उदाहरण है. मुख्य मुन्सियारी शहर से मात्र 2 किलोमीटर दूर नन्सैन्न गाँव के सुरेंदर सिंह पांगती जी के घर में स्थित यह निजी संग्रहालय  उनके  अथक प्रयासों और अपनी विरासत के प्रति उनकी लगन का नतीजा है. इस संग्रहालय में भोटिया जनजाति के लोगों की पारम्परिक जीवन शैली और विरासत को बड़े ही करीने से सहेजा गया है. भोटिया जनजाति के लोगों के पारंपरिक श्रंगार का सामान, रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाली चीजें जैसे कि मड-पेन, लकड़ी से बने कटोरे और खाने के बर्तन, भोटिया लोगों के पारम्परिक हुक्के आदि प्रमुख है. मुनस्यारी से बस, टैक्सी या फिर निजी वाहन से इस संग्रहालय पहुचा जा सकता है.

ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग एक्सपीडिशन-

(Trekking and Mountaineering Expedition in Munsiyari)

अगर आप ट्रैकिंग एक्सपीडिशन या माउंटेनियरिंग के शौकीन है तो मुनस्यारी आपके लिए आपके सपनों  के मंजिल की तरह साबित हो सकता है. मुनस्यारी में पड़ने वाले ग्लेशियर और बुग्याल नैसर्गिक सौन्दर्य की मिसाल तो है ही, साथ ही घूमने फिरने के शौकीन लोगों के लिए भी बेहतरीन विकल्प है. यहाँ पर ट्रैकिंग एवं अन्य साहसिक खेल तुलनात्मक तौर पर अन्य भारतीय साहसिक पर्यटक स्थलों से कम खर्चीले और गुणात्मक तौर पर ज्यादा बेहतर है. मुनस्यारी में आप घूमने-फिरने, कुदरती सौन्दर्य का आनंद लेने के साथ- साथ साहसिक पर्यटन के अपने सपने को भी पूरा कर सकते है.

  • ग्लेशियर (Glaciers of Munsiyari)   हिमालय की गोद में बसे होने के कारण मुनस्यारी ओर पिथौरागढ़ के आस- पास अनेकों छोटे- बड़े ग्लेशियर है. जिसमे से मिलम ग्लेशियर, रालम ग्लेश्यर, काली ग्लेशियर, नामिक ग्लेशियर, पोंटिंग ग्लेशियर, हीरामणि ग्लेशियर, पिनोरा ग्लेशियर आदि प्रमुख है. मुनस्यारी से लगभग 43 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद मिलम ग्लेशियर पहुचा जा सकता है. गर्मियों में मई से अक्तूबर तक के महीने में यहाँ देश-विदेश के हजारों ट्रैकर चलते रहते हैं.
  • बुग्याल (Bugyals of Munsiyari)- मुनस्यारी यात्रा के दौरान पर्यटक बुग्यालों की यात्रा का आनंद ले सकते है. ऊँचे पहाड़ों पर चढाई करने के बाद हरे- भरे घास के बड़े- बड़े मैदान घुमक्कड़ों के लिए कुदरत का अदभुत उपहार है. खलिया टॉप मुनस्यारी में पड़ने वाले बुग्यालों में सबसे नजदीकी बुग्याल है. इसके अलावा रुई बुग्याल, गैरधार बुग्याल, बनिक बुग्याल, कालामुनी और रातापानी आदि बुग्याल अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते है. बुरांस, तिमिस जैसे खूबसूरत फूलों ओर पेड़-पौधों के बीच बसे इन बुग्यालो पर आप कस्तूरी मृग मोनाल पक्षी आदि के साथ कुदरत की गोद में होते है.

कैसे पहुचें मुनस्यारी (How to Reach Munsiyari)

  • मुनस्यारी पहुचने के लिए आप भारत के अलग- अलग शहरों से पंतनगर, हल्द्वानी (काठगोदाम) तक लगभग हर तरह के यात्रा साधनों से पहुच सकते है. काठगोदाम के बाद पहाड़ी रास्ता शुरू हो जाने के कारण सड़क मार्ग ही आगे की यात्रा के लिए उपलब्ध है. काठगोदाम तक आप रेल मार्ग या फिर बस द्वारा भी पहुच सकते है. अगर आप हवाई मार्ग से यात्रा करना चाहते है तो आपको निकटतम एयरपोर्ट पंतनगर आना होगा. पंतनगर एअरपोर्ट मुनस्यारी से लगभग 310 कोलोमीटर दूर है. दिल्ली, देहरादून से सप्ताह के सातों दिन सीधी उड़ान सेवा उपलब्ध है. काठगोदाम तक की यात्रा आम तौर पर हर तरह से एक साधन- सुलभ यात्रा है.
  • काठगोदाम से आगे पहाड़ी यात्रा शुरू होती है. यह यात्रा आप सरकारी बसों के साथ- साथ निजी वाहन या फिर टैक्सी से भी तय कर सकते है. काठगोदाम से मुनस्यारी की यात्रा पहाड़ी प्रदेश में घूमने के आपके उद्देश्य को पूरा कर देगी. पूरा का पूरा रास्ता ही ख़ूबसूरत पर्यटन स्थलों से भरा पड़ा है. काठगोदाम से 20 किलोमीटर चलने के बाद सबसे पहले एक बेहद ही सुन्दर स्थान एवं तालों का शहर भीमताल आता है. उसके बाद फलों और फूलों का शहर भवाली, अल्मोड़ा होते हुवे शेराघाट से आप मुनस्यारी पहुच सकते है. काठगोदाम से मुनस्यारी के बीच की दूरी लगभग 280 किलोमीटर है. तो चलिए मुनस्यारी, आपकी ये यात्रा बेहद ही खूबसूरत होने वाली है.

कब जाये(Best Time to Visit Munsiyari)

मुनस्यारी घूमने के लिए आप जब कभी भी वहां के मौसम का मिजाज सही हो जा सकते है. मगर सबसे बेहतरीन समय मई से अक्तूबर के मध्य का है. गर्मियों के मौसम में यहाँ का तापमान एकदम सामान्य रहता है. और सड़क मार्ग के टूटने का खतरा भी कम रहता है. हालाँकि सर्दियों में भी बहुत सारे पर्यटक मुनस्यारी जाते है. जो लोग बर्फ का आनंद लेना चाहते है वो सर्दियों में मुनस्यारी जा सकते है, मगर सर्दियों में ठण्ड से बचने के उपायों के साथ जाना पड़ता है.

ध्यान में रखने योग्य बाते (Thing to Note Before Munsiyari Trip)

मुनस्यारी यात्रा के दौरान वहां के मौसम और भोगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुवे यात्रा से पहले कुछ बिन्दुओं पर विचार करना जरुरी है.

  • मुनस्यारी में मौसम ठंडा रहता है, ग्रीष्म रितु में भी रात्रि के समय ठण्ड का सामना करना पड़ सकता है. अतः गर्म कपडे साथ में रखना बुद्दिमानी है.
  • पर्वतीय छेत्र होने की वजह से आपको ट्रैकिंग के दौरान छोटी- मोटी परेसनियों से बचने के लिए ट्रैकिंग शूज और पहनने के लिए ट्रैक- शूट होना जरुरी है.
  • ब्लड-प्रेसर के मरीजों को अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुवे यात्रा की सलाह दी जाती है.
  • पहाड़ी रास्तों में ट्रैकिंग में चलते- चलते कई बार शाम होने की वजह से अधेरा हो जाता है, इसलिए टार्च- लाइट होना जरुरी है.
  • पहाड़ों में पैदल चलते समय कम वायु दवाब के कारण उल्टी और जी मिचलाने की समस्या आम हो होती है, इसलिए जरुरी दवा और ओ आर एस घोल साथ में रखना ठीक है.

आस – पास के अन्य पर्यटक स्थल (Other Tourist Places Near Munsiyari)

मुनस्यारी की यात्रा के साथ- साथ आप चाहे तो कुमाऊ के अन्य पर्यटक स्थलों की यात्रा पर भी जा सकते है. रानीखेत, नैनीताल, भवाली, भीमताल, चम्पावत, पिथौरागढ़ जैसे अलग- अलग स्थल अपनी अलग- अलग विशेषताओं के लिए जाने जाते है. इसके अलावा आप धार्मिक स्थलों की यात्रा करना चाहते है तो आपके पास अनेकों बेहतरीन विकल्प है. आप टनकपुर स्थित माता पूर्णागिरी मंदिर, चम्पावत स्थित बालेश्वर मंदिर, रानीखेत स्थित बिनसर महादेव, अल्मोड़ा स्थित चितई गोलू देवता मंदिर, जागेश्वर मंदिर, काठगोदाम से मुनस्यारी वाया अल्मोड़ा जाते हुवे नीम करोली बाबा जी का कैंची धाम मंदिर (Kainchi Ashram)आदि अनेकों धार्मिक स्थलों की यात्रा कर आशीर्वाद हासिल कर सकते है.

इसके आलावा चम्पावत स्थित मायावती आश्रम और अल्मोड़ा- बागेश्वर रस्ते में पड़ने वाला बिनसर सेंचुरी, रामनगर स्थित जिम कार्बेट नेशनल पार्क आदि पर्यटन स्थान भी पर्यटकों को काफी आकर्षित करते है.

By HindiWall

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माँ वैष्णो देवी | इतिहास | कैसे पहुचें | MATA VAISHNO DEVI MANDIR | HISTORY AND HOW TO REACH GUIDE

Vaishno Devi Mandir Yatra | हिन्दू धर्म में माँ वैष्णो देवी मंदिर एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. वैष्णो देवी मंदिर में लाखों लोग हर साल दर्शन करने आते है. पूरे वर्ष न सिर्फ हिंदुस्तान से बल्कि अन्य देशों से भी तीर्थयात्री इस मंदिर की यात्रा करके अपनी मनोकामना पूर्ण करते है. ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर हिंदुस्तान के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. माता वैष्णो देवी को “वैष्णवी माता” और “माता रानी” के नाम से भी जाना जाता है. हमारा देश मंदिर और तीर्थस्थलों का देश है. पूरे देश में अनेकों महान और विश्व-विख्यात मंदिर है, मगर जम्मू एवं कश्मीर राज्य के त्रिकुट पर्वत पर स्थिति माता रानी का यह मंदिर अपने आप में खास है. तीर्थयात्रियों की संख्या के आधार पर माँ वैष्णो देवी मंदिर भारतवर्ष के सबसे बड़े धार्मिक तीर्थस्थलों में शामिल है.

वैष्णो देवी मंदिर (Vaishno Devi Mandir Darshan)

(Vaishno Devi Mandir) – “माँ वैष्णो देवी मंदिर” भारत के जम्मू कश्मीर राज्य के रियासी जिले में स्थित कटरा नगर से लगभग 13 किलोमीटर दूर, समुद्र तल से 1550 मीटर ऊँची “त्रिकुट” नामक पहाड़ी पर अवस्थित है. कटरा से लगभग 13 किलोमीटर की यात्रा के बाद एक गुफा में विराजमान माता वैष्णो देवी का यह निवास स्थान भारतवर्ष के 108 शक्ति पीठों में से एक है. माता रानी के मुख्य मंदिर को भवन के नाम से भी जाना जाता है. भवन में स्थित गुफा में माता रानी एक पिंड के रूप में विराजमान है. यह पिंड माँ काली (दाई तरफ), माँ सरस्वती (मध्य में) और माँ लक्ष्मी (बाई तरफ) का सम्मलित रूप है. इन तीनों रूपों से बने इस पिंड को “माँ वैष्णो देवी” का रूप कहा जाता है. मुख्य मंदिर में इन तीन पिंडों के आलावा जम्मू कश्मीर के पूर्व नरेशों और भक्तों द्वारा स्थापित मुर्तिया और यंत्र आदि मौजूद है.

माता वैष्णो देवी मंदिर का पैराणिक इतिहास

(History of Vaishno Devi Mandir In Hindi)

(Mata Vaishno Devi Mandir In Hindi)  पैराणिक हिन्दू धर्मग्रथों के अनुसार, संसार में धर्म की हानि होने  और अधर्म का का प्रभाव बढ़ने के कारण आदिशक्ति ने त्रेतायुग में ‘सत’, ‘रज’ और ‘तम’ के तीन रूपों महा-सरस्वती, महा-लक्ष्मी, और महा-दुर्गा के सामूहिक बल से धर्म की रक्षा के लिए एक कन्या प्रकट की. कहा जाता है कि माँ वैष्णो देवी ने इसी कन्या के रूप में दक्षिण भारत के समुंद्री तट पर स्थित रामेश्वरम में एक संतानहीन परिवार के घर में जन्म लिया. माँ वैष्णो देवी के बचपन का नाम त्रिकुटा था. भगवान् विष्णु के वंश में जन्म लेने के कारण उनका नाम वैष्णो पड़ा. रत्नाकर सागर को उनका लौकिक पिता माना जाता है, कहा जाता है कि रत्नाकर सागर ने देवी बालिका के जन्म से पहले एक वचन लिया था कि वो अपनी होने वाली संतान की इच्छाओं का सम्मान करेंगे और कभी भी उनके खिलाप नहीं होंगे.

जब त्रिकुटा सिर्फ 9 वर्ष की थी तब उन्होंने अपने लौकिक पिता श्री रत्नाकर सागर के सम्मुख समुद्र किनारे जाकर तपस्या करने की इच्छा जताई. इस तपस्या का उद्देश्य भगवान श्रीराम को पति रूप में प्राप्त करना था. श्री रत्नाकर सागर ने अपने वचन के वसीभूत उन्हें आज्ञा दे दी और पिता की आज्ञा पाकर बालिका देवी त्रिकुटा समुद्र किनारे भगवत तपस्या में लींन हो गई. (Vaishno Devi Ka Mandir)

इसी बीच एक दिन विष्णु अवतार “भगवान श्री राम” माता सीता की ख़ोज करते हुवे समुद्र किनारे पहुचे. उनकी द्रष्टि तपस्या में लीन इस दिव्य बालिका पर पड़ी. देवी त्रिकुटा ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम से कहा कि वो उनको अपना पति मान चुकी है. यह सुनकर भगवान् श्री राम ने कहा कि इस अवतार में उनकी धर्मपत्नी सिर्फ “सीता जी” ही है, और वो उनके प्रति ही पति के रूप में पूर्ण निष्ठावान है.

भगवान् श्रीराम ने देवी त्रिकुटा को वचन दिया और कहा कि वो कलयुग में कल्कि अवतार लेकर उनसे जरूर विवाह करेंगे. तब तक वो उत्तर भारत में स्थित माणिक पहाड़ियों के बीच त्रिकुट नामक पर्वत में तपस्या करे और भक्तों के कष्टों का नाश कर जगत कल्याण करती रहें. भगवन श्री राम ने कहा एसा करने से पूरी दुनिया में उनकी पूजा की जाएगी तथा वो “माता वैष्णो देवी” के नाम से विश्व- विख्यात हो जाएँगी.

माँ वैष्णो देवी | कथाएं (Vaishno Devi Story In Hindi)

ब्राह्मण श्रीधर कथा ( Story Of Pandit Sridhar | Vaishno Devi Mandir)- कहा जाता है कि श्रीधर नाम का एक बहुत ही गरीब ब्राहमण माँ वैष्णो देवी का बड़ा भक्त था. श्रीधर का परिवार “वर्तमान के कटरा नगर” से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित “हंसली” नामक गाँव में रहता था. एक बार नवरात्री में कन्या पूजन के अवसर पर माँ वैष्णो देवी पंडित श्रीधर के घर आ गई. पूजा – पाठ ख़तम होने के पश्चात अन्य लोग तो चले गये मगर कन्या रूपी माँ वैष्णो देवी वही रुकी रही. उन्होंने पंडित श्रीधर से भंडारे का आयोजन करने के लिए कहा. पंडित श्रीधर ने भंडारा करने के लिए निकटतम गाँवों के लोगों को आमंत्रित किया साथ ही गुरु गोरखनाथ और उनके शिष्य भैरवनाथ को भी इस आयोजन में आमंत्रित किया गया.

 गाँव के लोगों को पंडित श्रीधर के इस आयोजन के बारे में शंका होने लगी कि ये गरीब ब्राह्मण आखिर कैसे भंडारे का आयोजन करेगा. और ये दिव्य कन्या आखिर क्यों भंडारे का आयोजन करना चाहती है. भैरवनाथ ने पंडित श्रीधर को बहुत डराया और कहा कि अगर भंडारे के आयोजन में कोई कमी अथवा त्रुटी हुवी तो उसे गंभीर हानि हो सकती है. भैरवनाथ की बातों को सुनकर तथा गाँव के लोगों के वर्ताव को देख कर पंडित श्रीधर बहुत निराश हुवे और चिंता में डूब गए. (Maa Vaishno Devi Temple)

 इसी बीच भंडारे के समय माँ वैष्णो देवी उसी दिव्य बालिका के रूप में पंडित श्रीधर के सम्मुख पुनः प्रकट हुवी और कहा कि उन्हें निराश होने की बिलकुल जरुरत नहीं है. भंडारे की सारी व्यवस्था हो चुकी है, लोगों को आप अपनी छोटी सी कुटिया में बिठा दीजिये. इतना बोलकर वो कन्या एक दिव्य बर्तन से खुद ही लोगों को खाना परोसने लगी. इस तरह माता रानी की कृपा से भंडारे का आयोजन सम्मानपूर्वक संपन्न हो गया. यह सब देखने के बाद पंडित श्रीधर माँ वैष्णो देवी के और भी परम भक्त हो गये. उन्होंने त्रिकुट पर्वत स्थित उस गुफा में पहुच कर देवी माँ की पूजा अर्चना में ही अपना जीवन लगा दिया. माना जाता है कि माता वैष्णो देवी मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले पुजारी और पंडित श्रीधर के ही वंसज है.

भैरवनाथ की प्रसिद्द कथा (Story Of Bhaironath | Vaishno Devi Mandir) – भैरवनाथ जब पंडित श्रीधर द्वारा आयोजित भंडारे में पहुचा तो उनसे भंडारे के पवित्र भोजन को ग्रहण करने से मना कर दिया और मांस – मदिरा की मांग करने लगा. पंडित श्रीधर ने इस बात को लेकर असहमति जताई. मगर भैरवनाथ नहीं माना और आपनी मांग पर अडिग रहा, यह सब देखकर भंडारे में पहुची कन्या रूपी माँ वैष्णो देवी ने भी भैरवनाथ को उसके हठ को लेकर समझाने- बुझाने की बहुत कोसिश की, मगर भैरवनाथ ने एक न सुनी. उल्टा वो उस कन्यारुपी “माँ वैष्णो देवी” के पीछे भागने लगा. यह देख कर भंडारे में आई कन्या रूपी माता रानी को भैरोनाथ की नियत का आभास हो गया और वो हवा का रूप धरकर “त्रिकुट पर्वत” की तरफ चलीं गईं.

भैरवनाथ माँ वैष्णो देवी का पीछा करते हुवे गुफा के द्वार तक पहुच गया. यह देख माँ वैष्णो देवी ने हनुमान को बुलाकर कहा कि में नौ महीने तक इस गुफा के अन्दर तपस्या करुँगी तब तक तुम भैरोनाथ को गुफा में प्रवेश मत करने देना. भेरोनाथ गुफा के बाहर हनुमान जी से युद्ध करने लगा, यह देखने पर की हनुमान जी युद्ध करते- करते थक गये माता रानी ने काली का रूप धर त्रिकुट पर्वत में ही भैरवनाथ का संहार कर दिया. भैरोनाथ का सिर धड से अलग होकर, अर्धक्वारी गुफा से लगभग 7 कीलोमीटर तथा मुख्य मंदिर से 1.5 किलोमीटर दूर भैरो घाटी में जाकर गिरा.

मरते वक्त भैरोनाथ द्वारा क्षमा याचना करने पर माता रानी ने उसे वरदान दिया कि “जो भी इन्सान मेरे दर्शन को आएगा उसका दर्शन तभी पूर्ण होगा जब वो वो भैरवनाथ मंदिर के दर्शन करेगा”. तब से अब तक जो भी भक्त माँ वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाते है, भैरवनाथ मंदिर के दर्शन भी जरूर करते है.

मंदिर के अन्य दर्शनीय स्थल

  • बाणगंगा नदी (Banganga River | Mata Vaishno Devi Mandir) बाणगंगा नदी कटरा से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. कहा जाता है की हनुमान जी को एक बार प्यास लगने पर माता रानी ने अपने धनुष से पहाड़ पर बाण चलाकर एक जलधारा पैदा की थी. उसी पवित्र जलधारा को आज बाणगंगा के नाम से जाना जाता है.
  • चरण पादुका (Charan Paduka | Vaishno Devi Mandir) बाणगंगा से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद अर्धक्वांरी से 3.5 किलोमीटर  पहले ही एक शिला पर  माता रानी के पवित्र चरणों के निशान है जिन्हें चरण पादुका कहा जाता है. चरण पादुका के दर्शन कर भक्त माता रानी को प्रणाम करते है और आशीर्वाद लेते है . चूकी “चरण पादुका” यात्रा के रस्ते में ही है इसलिए  दर्शन में भी ज्यादा समय नहीं लगता. चरण पादुका के पास ही “माँ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड” की मेडिकल यूनिट भी है, जो आते-जाते भक्तों से सेवा के लिए हमेशा तैनात रहती है.
  • माँ वैष्णो देवी “अर्धक्वारी गुफा” (Ardhkuwari Cave | Vaishno Devi Mandir Yatra) बाणगंगा से लगभग 6 किलोमीटर दूरी पर पवित्र अर्धक्वारी गुफा है. अर्धक्वारी के बारे में मान्यता है कि, इस गुफा में माँ वैष्णो देवी ने 9 महीने तक तपस्या की थी. हनुमान जी ने इसी गुफा के बाहर नौ महीने तक माँ वैष्णो देवी की रक्षा की और भैरवनाथ को अन्दर नहीं आने दिया.
  • वैष्णो देवी स्थित भैरोनाथ मंदिर ( Bhairavnath Mandir | Maa Vaishno Devi Mandir) माता रानी ने महा शक्तिशाली काली का रूप धर कर जब भैरवनाथ का वध किया तो भैरोनाथ का मस्तक धड से अलग होकर पवित्र मंदिर से 1.5 किलोमीटर दूर भैरवघाटी नामक स्थान पर जाकर गिरा था. इसी स्थान पर भैरव नाथ का मंदिर बना है.

वैष्णो देवी मंदिर से संबंधित मान्यताएं-

(Beliefs Related Vaishno Devi Mandir) 

  • वैष्णो देवी से संबंधित अनेकों मान्यताएँ है. बाणगंगा के बारे में कहा जाता है कि हनुमान जी की प्यास बुझाने के लिए माता रानी ने बाणगंगा नदी को अवतरित किया और बाद में  उसमे अपने केश भी धोये थे. इसीलिए बाणगंगा के जल को बहुत पवित्र माना जाता है. ये मान्यता है कि जो भी भक्त बाणगंगा नदी के पवित्र जल से स्नान करता है उसकी सारी व्याधियां ख़त्म हो जाती हैं.
  • माँ वैष्णो देवी के दर्शन करने के बाद भैरवनाथ के दर्शन को जरुरी माना जाता है. कथानुसार माँ वैष्णो देवी ने स्वयं भैरवनाथ को ये वरदान दिया था कि जो भी भक्त मेरे दर्शन करने आएगा वो भैरोनाथ के दर्शन भी जरूर  करेगा. मान्यता है कि भैरोनाथ के दर्शन के बिना माँ वैष्णो देवी के दर्शन पूर्ण नहीं होते.
माता वैष्णो देवी ने भगवान् श्रीराम द्वारा रावण के विरुद्ध युद्ध में “श्रीराम सेना” की विजय हेतु नवरात्रों का आयोजन भी किया था. इसी सन्दर्भ को लेकर आज भी वैष्णो देवी मंदिर में नवरात्रों के समय “रामायण पाठ” का आयोजन किया जाता है.

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“वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा ” (Vaishno Devi Mandir Yatra)

(How To Reach Vaishno Devi) कहा जाता है कि माता रानी के बुलावे पर भक्त बड़ी आसानी से माँ वैष्णो देवी के मंदिर पहुच जाते है. भारतवर्ष के इस महत्वपूर्ण तीर्थस्थल तक पहुचने के लिए आपको यात्रा के सबसे पहले पड़ाव “जम्मू एवं कश्मीर” राज्य के “जम्मू” शहर पहुचना होगा.

vaishno devi mandir yatra
  • कैसे पहुचे जम्मू (How To Reach Jammu | Vaishno Devi Mandir) जम्मू पहुचने के लिए उत्तर भारत के लगभग हर प्रमुख शहर से ट्रेन, बस या फिर टैक्सी के द्वारा यात्रा की शुरुवात की जा सकती है. देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ आदि से हवाई मार्ग द्वारा भी जम्मू शहर पहुचा जा सकता है. गर्मियों के मौसम यात्रियों की संख्या ज्यादा होने के कारण भारतीय रेलवे द्वारा प्रतिवर्ष कुछ विशेष ट्रेनें दिल्ली से जम्मू के लिए चलाई जाती है. जम्मू एवं कश्मीर परिवहन द्वारा भी विशेस बसों का प्रचालन किया जाता है.
  • जम्मू से कटरा तक की यात्रा- (Jammu To Katra | Vaishno Devi Mandir) वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा का दूसरा पड़ाव जम्मू का कटरा क़स्बा है. जम्मू से कटरा तक की दूरी 50 किलोमीटर है, जिसे तय करने में 2 घंटे लगते है. जम्मू रेलवे स्टेशन से कटरा के लिए विशेस ट्रेन भी जाती है साथ ही जे & के परिवहन की बसों या फिर टैक्सी और निजी वाहन से भी कटरा पहुचा जा सकता है. जम्मू शहर के लगभग हर स्थान से आप टैक्सी किराये पर लेकर कटरा तक की यात्रा कर सकते है. अगर आप हवाई मार्ग से जम्मू एयरपोर्ट पहुचते है तो आपको जम्मू एअरपोर्ट पर जम्मू एवं कश्मीर परिवहन की बस या फिर टैक्सी मिल जाएगी जिसके जरिये आप कटरा पहुच सकते है. अगर आप अपना निजी वाहन लेकर चल रहे है तो भी आप कटरा तक आसानी से निजी वाहन से यात्रा कर सकते है. निजी वाहन से जाने वाले यात्री चाहे तो कुंजवनी से बाई-पास ले सकते है.
  • कटरा से माँ वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा (Katra to Vaishno Devi Mandir Yatra) कटरा से माता रानी के मंदिर तक पहुचने के लिए की जाने वाली यात्रा ही माता वैष्णो देवी मंदिर की वास्तविक यात्रा है. कटरा से आगे के यात्रा के लिए यात्रियों को यात्रा पर्ची  बनवानी पड़ती है. पर्ची लेने के बाद 3 घंटे के अन्दर ही आपको बाणगंगा स्थित जाँच केंद्र पहुचना होता है. यहाँ  पर सामान की जाँच के बाद ही आगे की यात्रा शुरू होती है.

याद रहे कि पर्ची लेने के 3 घंटे के अन्तराल में ही आप जाँच केंद्र पहुच जाये वरना पर्ची की वैधता समाप्त मानी जाती है. हो सके तो यात्रा प्रारंभ करने के कुछ समय पहले ही या अपनी सुविधानुसार पर्ची लें. ताकि निश्चित अवधि से पहले- पहले जाँच केंद्र पहुच कर यात्रा शुरू कर सकें. इसी यात्रा के दौरान अनेक जगहों पर क्लॉक रूम की सुविधा उपलब्ध है, यात्रियों को निश्चित शुल्क देकर अपना सामान क्लॉक रूम में जमा करवा देना चाहिए ताकि यात्रा करने में आसानी हो. यात्री दिन के समय कटरा में ही किसी धर्मशाला या फिर होटल में विश्राम कर सायं के समय यात्रा आरम्भ करते है. अधिकतर यात्री रात्रि के समय ही इस यात्रा को सुविधाजनक मानते है.

यात्रा मार्ग चयन-

  1. यात्रा का मुख्य मार्ग. (Main Route Of Vaishno Devi Mandir) माँ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के हाथों मंदिर देखभाल की जिम्मेदारी आने के बाद यात्रा मार्ग में काफी सुधार किये गये है. मुख्य रस्ते का काफी हिस्से को तीन शेड से कवर किया गया है ताकि बारिश के मौसम में यात्रियों को परेशानी का समाना न करना पड़े. मुख्य मार्ग पर जगह- जगह पानी के नल और वाटर कूलर लगे हुवे है. पूरे रस्ते अनेक जगह टॉयलेट और वाशरूम इत्यादि की अच्छी सुविधा है. मुख्य मार्ग में रात्रि के समय में रौशनी बनी रहे इसके लिए उच्च दबाव की हेलोजन लाइट की व्यवस्था है.
  2. वैकल्पिक मार्ग ( Alternative Route To Vaishno Devi Mandir) लगातार यात्रियों के बढ़ते दबाव और मुख्य मार्ग की कठनाइयों को देखते हुवे, माँ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने 1990 में एक वैकल्पिक रास्ते का निर्माण कार्य शुरू किया, ये रास्ता 1999 में यात्रियों के लिए खोल दिया गया. नए रास्ता मुख्य मार्ग से 500 मीटर छोटा है, साथ ही इस रस्ते में घोड़े इत्यादि के न चलने के कारण यात्रियों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. नया रास्ता अर्धक्वारी से थोडा पहले “इन्द्रप्रस्थ व्यू पॉइंट” से शुरू होता है और माता रानी के मुख्य मंदिर “भवन” तक जाता है. नया रास्ता पुराने की अपेक्षा अधिक चौड़ा और चलने के लिए आसान है. रस्ते में हर जरुरी सुविधा जैसे कि पानी और टॉयलेट इत्यादि की अच्छी सुविधा मौजूद है. जगह जगह पर चाय, काफी और रिफ्रेशमेंट के लिए छोटे- बड़े स्टाल्स भी इस रस्ते में मौजूद है. अर्धक्वारी से महल तक के लिए बैटरी चालित गाड़िया मौजूद होती है. हालाँकि अधिक भीड़ होने पर जल्दी इन गाड़ियों का उपलब्ध हो पाना थोडा मुस्किल जरूर होता है. मगर एडवांस बुकिंग आपकी यात्रा को सुविधा-जनक बना देगी
पैदल यात्रा करने वालों के लिए कटरा से माँ वैष्णो देवी की वास्तविक यात्रा आरम्भ होती है. खड़ी पहाड़ी चढ़ते हुवे यात्री धीरे-धीरे विश्राम करते करते हुवे माता रानी के जयकारों के साथ आगे बढ़ते जाते है. लगभग 6 किलोमीटर की यात्रा तय करने के बाद अर्धक्वारी गुफा आ जाती है. भीड़ कम होने की स्थिति में, यात्री मंदिर को जाते हुवे ही अर्धक्वारी गुफा के दर्शन कर सकते है. भीड़ ज्यादा होने पर कुछ यात्री वापसी के समय भी अर्धक्वारी गुफा में माता रानी के दर्शन करते है. अर्धक्वारी से लगभग 6 किलोमीटर की यात्रा के बाद यात्री सांझीछत नामक स्थान पर पहुचते है. कुछ ही दूरी की यात्रा तय करने के बाद भवन में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.

भवन में पहुच जाने पर  ( At Bhawan | Vaishno Devi Mandir)भवन यानि की  माता वैष्णो देवी के मुख्य मंदिर में प्रवेश के लिए यात्रियों को अलग- अलग ग्रुप में बाँट दिया जाता है. ग्रुप के हिसाब से ही लाइन में लग कर मुख्य मंदिर में प्रवेश करना होता है.  मंदिर में माता वैष्णो देवी के दर्शन के उपरांत यात्री मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित भेरोनाथ मंदिर जाते है और वापस आते हुवे अर्धक्वारी के दर्शन करते हुवे कटरा आ जाते है.

कटरा से मंदिर पहुचने के लिए यात्रा के साधन (Helicopter Service | Vaishno Devi Mandir) 

जो यात्री कटरा से पैदल यात्रा नहीं कर सकते या पैदल नहीं जाना चाहते वो हेलीकाप्टर सेवा का लाभ उठा सकते है. हेलीकाप्टर से यात्रा करना समय के लिहाज से ठीक है. 1005 रूपये खर्च कर आप सांझी छत तक हेलीकाप्टर से यात्रा कर सकते है . आप आने और जाने के लिए हेलीकाप्टर सेवा का लाभ ले सकते है. इसके अलावा घोड़े और पोर्टरों की सहायता से भी माता वैष्णो देवी दर्शन यात्रा तय की जा सकती है. अर्धक्वारी से बैटरी चालित छोटे वाहन से भी भवन के नजदीक तक यात्रा की जा सकती है. हेलोकोप्टर सेवा के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप  माँ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट देखें.

माँ वैष्णो देवी “यात्रियों के विश्राम के लिए विकल्प (Hotels Near Vaishno Devi Mandir) 

माँ वैष्णो देवी ट्रस्ट ने यात्रियों को परेशानियों से बचाने के लिए अनोको इंतजाम किये है. रुकने के लिए धर्मशालाओं की व्यवस्था भी कटरा से लेकर भवन तक अनेकों जगह पर है. इन धर्मशालाओं में रूककर यात्री विश्राम कर सकते है. इसके अलावा निजी होटलों में भी रुकने की अच्छी व्यवस्था है. इन होटल और धर्मशालाओं की पूर्व बुकिंग करना बेहतर कदम हो सकता है. यात्री चाहे तो जम्मू आकर भी बेहतरीन निजी होटलों में रुक सकते है.

वैष्णो देवी मंदिर के आस- पास अन्य दर्शनीय स्थल (Other Tourist Places Near Vaishno Devi Mandir)

माँ वैष्णो देवी के दर्शन करते हुवे यात्री जम्मू एवं कश्मीर के अन्य धार्मिक और पर्यटक स्थलों पर घूमने की प्लानिंग भी कर सकते है. माँ वैष्णो देवी के नजदीक ही अनेको पर्यटक स्थल जेसे कि जम्मू स्थित रघुनाथ मंदिर, अमर महल आदि स्थान घूमने के लिहाज से बेहतरीन है. यात्री यदि चाहे तो कुछ अधिक दूरी तय कर पर्यटक स्थल “पथनी टॉप” भी घूमने जा सकते है. पथनी टॉप जम्मू से लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर जम्मू एवं कश्मीर रास्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है. इसके अलावा कश्मीर की खूबसूरत वादियों में स्थित पर्यटक स्थल जैसे कि गुलमर्ग, सोनमर्ग आदि की यात्रा का प्लान भी माँ वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा के साथ बनाया जा सकता है.

वैष्णो देवी यात्रा में ध्यान देने योग्य बातें

(Things To Note While Visiting Vaishno Devi Mandir)

  • बल्ड प्रेशर के मरीजों को पैदल यात्रा से परहेज करना चाहिए. वो हेलीकाप्टर या फिर घोड़े और  पोर्टर आदि की सहायता ले कर यात्रा कर सकते है.
  •  यात्रा में अधिक चढ़ाई होने के कारण आपको जी मचलाने सम्बंधित परेशानी आ सकती है. इसलिए पानी और कुछ दवाइयों का साथ होना लाभदायक हो सकता है.
  • यात्रियों को अपने सभी साथियों के साथ मिलकर यात्रा करनी चाहिए.
  • यात्रा के दौरान बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरुरत है.
  • बहुत ज्यादा उम्रदराज यात्रियों को यात्रा के लिए पैदल मार्ग के बजाय अन्य साधनों का इस्तेमाल करना आरामदायक होगा.
  • यात्रियों के यात्रा के दौरान कम से कम सामान साथ में रखना चाहिए. यात्री क्लॉक रूम में अपना सामान जमा करने के उपरांत ही यात्रा आरम्भ करे तो बेहतर होगा.
  • यात्रा के लिए गर्मियों का मौसम ही उचित है. क्योकि सर्दियों में तापमान बहुत कम होता है तथा बरसात में चट्टानों के खिसक जाने का डर बना रहता है.
  • पहाड़ी में खड़ी यात्रा में दौरान छड़ी आपकी यात्रा को सुगम बना सकती है.
  • यात्रा के लिए ट्रेकिंग शूज का इस्तेमाल करना आरामदायक साबित होगा
  • यात्रा का उत्साह और जय माता दी बोलते रहने से यात्रा करना थकन भरा नहीं होगा.

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