MAYAWATI ASHRAMA| मायावती आश्रम | इतिहास | कैसे पहुचें

Mayawati Ashrama  मायावती आश्रम | अद्वैत आश्रम उत्तराखंड के महत्त्वपूर्ण पर्यटक स्थलों में शुमार है. चम्पावत जिले के लोहाघाट कस्बे से लगभग 9 किलोमीट उत्तर पक्षिम की ओर मायावती नामक स्थान पर स्थिति यह आश्रम स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda In Hindi) की यादों और विचारों का केंद्र बिंदु है. स्वामी विवेकानंद जी के जीवन दर्शन को समझने और उनके बताये हुवे मार्ग के बारे में जानने की तम्मना रखने वालों के लिए अद्वैत आश्रम मायावती एक अदभुत स्थान है. मायावती आश्रम अपनी नैसर्गिक सौन्दर्य और एकांतवास के लिए प्रसिद्द है. बुरांस, देवदार, बांज और चीड आदि के जंगलों के बीच बसा यह आश्रम ना सिर्फ उत्तराखंड बल्कि देश और विदेश के अनेकों शांति और सौन्दर्य प्रेमी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है.

अद्वैत आश्रम मायावती संछिप्त जानकारी
ADVAITA ASHRAMA MAYAWATI

अद्द्वैत आश्रम मायावती,  रामकृष्ण मठ की एक शाखा है. इसकी स्थापना 19 मार्च 1999 को स्वामी विवेकानंदा की प्रेरणा से उनके शिष्य स्वामी स्वरूपानंद सहित उनके अंग्रेज शिष्य दम्पति “कैप्टन जे एच सेविअर” और पत्नी सी एलिजाबेथ सेवियर ने मिलकर की थी. सेवियर दंपत्ति इंग्लेंड में अपना घर और जमीन बेचकर स्वामी विवेकानंद के साथ भारत आ गये और लोहाघाट के मायावती में अद्द्वैत आश्रम की स्थापना की. कैप्टन जे एच सेविअर भारत आने के बाद पूरे समय अपनी पत्नी सहित अद्द्वैत वेदांत के प्रचार प्रसार और “प्रबुद्द भारत” नामक मासिक पत्रिका के कार्य में लगे रहे. बहुत अल्प समय में ही 28 अक्टूबर 1900 को कैप्टन जे एच सेविअर का देहांत हो गया.

शिष्य जे एच सेविअर के देहांत हो जाने के उपरांत स्वामी विवेकानंद, श्रीमती सी एलिजाबेथ सेवियर को सांत्वना देने के लिए 3 जनवरी 1901 के दिन मायावती आश्रम आये थे. स्वामी जी यहाँ लगभग 15 दिन यानि कि  18 जनवरी 1901 तक रुके थे.

स्वामी विवेकानंद चाहते थे कि अद्वैत आश्रम मायावती में किसी मूर्ति या तस्वीर की पूजा न की जाये. इसलिए उनकी आज्ञा अनुसार यहाँ कोई पूजा पाठ नहीं किया जाता. हालाँकि सायं के समय राम-धुन संक्रीतन जरूर होता है.

समाज कल्याण के कार्य
SOCIAL WORK AT ADVAITA ASHRAMA MAYAWATI

सन 1901 में यहाँ एक छोटे से पुस्तकालय की स्थापना की गई थी जिसमे स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचार, दर्शन, आध्यात्म और योग सहित अनेकों विषयों पर लिखी गई किताबों का संकलन है. मायावती आश्रम में एक धर्माथ अस्पताल की स्थापना भी सन 1903 में की गई थी. जिसमे आस पास के गरीब लोगों को मुफ्त चिकित्सा सहायता की जाती है. यह रुग्णालय लोहाघाट, चम्पावत के ग्रामीणों के लिए आज किसी वरदान से कम नहीं है. देश-विदेश से बेहतरीन चिकित्सक यहाँ सेवाकार्य के लिए आते है. जिसका खूब फायदा यहाँ के लोगों को होता है. आश्रम में, बाहर से आये हुवे अथितियों के रुकने के लिए धर्मशाला की सुविधा भी है.

अद्वैत आश्रम मायावती  का इतिहास
HISTORY OF MAYAWATI ASHRAMA

अद्दवैत आश्रम की स्थापना के बारे में जानने के लिए हमें आश्रम की स्थापना के समय से कुछ वर्ष पीछे जाकर स्वामी विवेकानंद के जीवन वृतांत को समझना होगा.

1895 स्वामी विवेकानंद इंग्लेंड में थे तो वही के एक निवासी जेम्स हेनरी सेवियर आपनी पत्नी सी एलिजाबेथ सेविएर के साथ स्वामी जी से मिलने आये. जेम्स हेनरी तथा उनकी पत्नी सी एलिजाबेथ हेनरी की अध्यात्म में काफी रूचि थी और वो स्वामी विवेकानंद के दर्शन और व्याख्यान से काफी प्रभावित हुवे. 1896 में जब स्वामी जी स्विट्जर्लैंड, जर्मनी और इटली की यात्रा पर गये तो हेनरी दम्पत्ति भी स्वामी विवेकानंद के साथ चल दिए. इसी बीच जब स्वामी विवेकानंद और हेनरी दम्पत्ति ऐल्प्स पर्वत की यात्रा पर थे तब उन्होंने भारत के हिमालयन राज्य में संतो के एकांतवास और वेदांत के अध्यन के लिए एक आश्रम बनाने की इच्छा व्यक्त की.

सेवियर दम्पति और मायावती आश्रम
SEVIOAR FAMILY AND ADVAITA ASHRAMA MAYAWATI

इसी कार्य को सम्पन करने के लिए सेवियर दम्पति ने स्वामी विवेकनद से भारत आने की इच्छा वक्त की. स्वामी जी की आज्ञा पाकर दिसम्बर 1896 को सेवियर दम्पति स्वामी विवेकानंद के साथ भारत के लिए रवाना हो गये फ़रवरी 1897 को वो मद्रास पहुचे. स्वामी विवेकानंद जी कलकत्ता चले गये और सेवियर दम्पति अल्मोड़ा आ गये. अल्मोड़ा आ कर उन्होंने एक बंगला किराये पर लिया जहा वो दो वर्षों तक ठहरे. इस दौरान उन्होंने आश्रम के लिए उपयुक्त स्थान की खोज जारी रखी और अंततः जुलाई 1898 में लोहाघाट के नजदीक मायावती नामक स्थान जो की एक चाय बगान था का चुनाव किया और इसे आश्रम के लिये खरीद लिया गया.

mayawati ashrama

स्वामी स्वरूपानंद की सहायता से अद्वैत आश्रम मायावती 19 मार्च 1899 को बनकर तैयार हो गया. स्वामी स्वरूपानंद इस आश्रम के प्रथम प्रमुख बने. चेन्नई मठ से निकलने वाली प्रबुद्ध भारत नामक पत्रिका के संपादक की अचानक मुर्त्यु के बाद पत्रिका के संपादन और प्रकाशन की जिम्मेदारी भी मायावती आश्रम के पास आ गई. स्वामी स्वरूपानन्द जी ने प्रबुद्ध भारत के संपादक का कार्यभार संभाला और मायावती आश्रम में ही इसके प्रकाशन का कार्य भी किया जाने लगा.

स्वामी विवेकनादं का अद्वैत आश्रम मायावती को पत्र
LATTER TO MAYAWATI ASHRAMA

आश्रम के उद्घाटन के अवसर पर मार्च 1899 को स्वामी विवेकानंद ने एक पत्र भेजा कर कहा था कि “सत्य को आजादी के साथ फैलने देने, मानव के जीवन को ऊँचा उठाने और मानव मात्र के कल्याण के लिए हम अद्वैत आश्रम की शुरुवात करते है. हम उम्मीद करते है की अद्वैत आश्रम  सभी प्रकार के अन्धविस्वासों और कमजोर करने वाले विकारों को दूर रखेगा, साथ ही यहाँ एकता के सिद्दांत का मनन किया जायेगा. सभी प्रणालियों के साथ पूरी सहानभूति रखते हुवे यह आश्रम सिर्फ अद्वैत के लिए समर्पित है”.

अद्वैत आश्रम मायावती से प्रकाशित साहित्य
LITERATURE PUBLISHED  FROM ADVAITA ASHRAMA MAYAWATI

अद्वैत आश्रम मायावती से अंग्रेजी मासिक पत्रिका प्रबुद्ध भारत के अलावा अनेक महत्वपूर्ण साहित्य का जैसे कि भक्ति योग, ज्ञान योग, राज योग, स्वामी विवेकानंद के पत्र आदि प्रकाशन किया गया.

कैसे पहुचे अद्वैत आश्रम मायावती
HOW TO REACH ADVAITA ASHRAMA MAYAWATI

अद्वैत आश्रम मायावती पहुचने के लिए आपको उत्तराखंड के चम्पावत जिले में स्थित लोहाघाट शहर पहुचना पड़ेगा.

दिल्ली  से अद्वैत आश्रम मायावती
DELHI TO ADVAITA ASHRAMA MAYAWATI

दिल्ली से अद्वैत आश्रम मायावती पहुचने के लिए आप रेल मार्ग से काठगोदाम तक आ सकते है. काठगोदाम से रोड मार्ग के जरिये उत्तराखंड परिवहन की बस या निजी वाहन से टनकपुर, चम्पावत होते हुवे आप लोहाघाट पहुचेंगे. लोहाघाट से 9 किमी दूर मायावती आश्रम स्थित है.

रोड मार्ग से अद्वैत आश्रम मायावती
ADVAITA ASHRAMA MAYAWATI BY ROAD

आप दिल्ली, देहरादून या किसी भी शहर से हल्द्वानी या फिर टनकपुर, चम्पावत, लोहाघाट रोड मार्ग से भी पहुच सकते है. देल्ही से लोहाघाट सीधे रोड मार्ग से दूरी लगभग 430 किलोमीटर है. अगर आप काठगोदाम आते है तो आप एक अन्य मार्ग काठगोदाम से देवीधुरा होते हुवे भी लोहाघाट पहुच सकते है.

हवाई मार्ग से अद्वैत आश्रम मायावती.
ADVAITA ASHRAMA MAYAWATI BY AIR

अगर आप हवाई मार्ग से यात्रा करना चाहते है तो पंतनगर एअरपोर्ट सबसे नजदीकी एअरपोर्ट है. दिल्ली और देहरादून आदि बड़े शहरों से हवाई सेवा उपलब्ध रहती है. पंतनगर से लोहाघाट के बीच की दूरी लगभग 180 किलोमीटर है.

चम्पावत स्थिति अन्य मत्वपूर्ण पर्यटक स्थल
OTHER TOURIST PLACES AT CHAMPAWAT 

पर्यटक स्थलों के लिहाज से चम्पावत पूरे उत्तराखंड में एक मत्वपूर्ण स्थान है. पैराणिक महत्व के पर्यटक स्थल हो या एतिहासिक, चम्पावत दोनों ही मामलों में से एक बेहतरीन जगह है. जब आप मायावती आश्रम धूमने की योजना बना रहे हों तो आस- पास के पर्यटन स्थल और मंदिर घूमना न भूले.

ADVAITA ASHRAMA MAYAWATI
Advaita Ashrama Mayawati To Abott Mount

अद्वैत आश्रम मायावती जाने के बाद आप लोहाघाट से कुछ ही दूरी पर स्थित एबट माउंट घूमना न भूलें, साथ ही चम्पावत स्थित एतिहासिक बालेश्वर मंदिर भी आप जा सकते हैं

लोहाघाट से लगभग 40 किलोमीटर दूर देवीधुरा स्थित माँ बाराही देवी मंदिर जाना न भूले, यही से आगे लगभग 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित रीठा साहिब गुरूद्वारे जाना भी काफी रोमांचक होगा.

आप वापस आते हुवे टनकपुर से लगभग 20 किमी दूरी पर स्थित माँ पूर्णागिरी मंदिर Purnagiri Mandir के दर्शन करने भी जा सकते है. साथ ही इसी रस्ते में आगे बड़ते हुवे आप नानकमत्ता साहिब के दर्शन भी कर सकते है.

          (Advaita Ashrama Mayawati मायावती आश्रम) By HindiWall

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