मुनस्यारी | पर्यटन, इतिहास | कैसे पहुंचे | MUNSIYARI UTTARAKHAND

Munsiyari Uttarakhand India | घूमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिए मुनस्यारी एक बेहतरीन मंजिल के खूबसूरत पड़ाव की तरह है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित यह छोटा सा पर्वतीय शहर अपने आप में अनेकों विशेषताओं को समेटे हुवे है. चारों ओर से पर्वतों से घिरा हुवा यह शहर दो तरफ से अन्तरास्ट्रीय सीमाओं से भी घिरा हुवा है. सामने पंचाचूली पर्वत, बाई तरफ नंदा देवी ओर त्रिशूल दाई तरफ डानाधार तथा पीछे की तरफ खलिया टॉप मुनस्यारी शहर की खूबसूरती में चार चाँद लगाते है. मुनस्यारी की नेपाल ओर तिब्बत के साथ अन्तरास्ट्रीय सीमायें लगती है. खूबसूरत बुग्याल घूमने के शौकीन पर्यटकों, माउंटेनियरिंग और ट्रैकिंग के शौकीन व्यक्तियों के लिए मुनस्यारी एक अच्छा विकल्प हो सकता है.

स्थिति (Munsiyari Uttarakhand)

समुन्द्र तल से 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मुनस्यारी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है. मुनस्यारी नगर नैनीताल जिले में स्थित काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 295 किलोमीटर तथा पंतनगर एअरपोर्ट से 330 किलोमीटर दूर स्थित है. दिल्ली से मुनस्यारी की दूरी लगभग 600 किलोमीटर है.

एतिहासिक महत्व (History )

पैराणिक द्रष्टि से भी मुनस्यारी एक मत्वपूर्ण स्थल है. कहा जाता है कि पांडवों ने यही से स्वर्गारोहण की शुरुवात की थी. द्रौपती ने पांच पांडवों के स्वर्गारोहण से पहले यही पर अंतिम बार भोजन बनाया था, माना जाता है की पंचाचूली पर्वत के पांच शिखर इसी बात को दर्शाते है.

Munsiyari Uttarakhand गौरीगंगा नदी के साथ- साथ मिलम तक फैला हुवा यह इलाका एतिहासिक तौर पर भी काफी महत्वपूर्ण है.  मुख्य मुनस्यारी शहर कभी भारत-तिब्बत व्यपार का केंद्र बिंदु रहा है. 1962 भारत- चीन युद्द के पूर्व यहाँ  व्यपार काफी सम्रद्द हुवा करता था. यहाँ के मुख्य निवासी शौका और भोटिया जनजाति के लोग आर्थिक तौर भारत- तिब्बत व्यपार के ऊपर निर्भर थे. परन्तु युद्ध के बाद की बदली परिस्थियों और सीमा के बंद हो जाने के कारण व्यापारिक गतिविधिया ख़त्म हो गई.

क्यों जाएँ मुनस्यारी (Tour Munsiyari India) 

मुनस्यारी के सम्पूर्ण क्षेत्र को कुदरत ने बहुत ही खूबसूरत नेमतों से नवाजा है. सुखद शांति और अनछुई प्राकर्तिक छटा का ऐसा सम्मिलन मुनस्यारी के आलावा हिंदुस्तान में शायद ही कहीं और होगा. अगर आप शांत-चित्त घुम्मकड़ है तो आपको मुनस्यारी जरूर जाना चाहिए.

Hill Station Munsiyari | मुनस्यारी प्राकर्तिक निर्मलता का भंडार होने के साथ- साथ अपनी कठिन पर्वतीय संरचना के लिए भी जाना जाता है. अपनी इसी अक्खड़ और कठिन भौगोलिक संरचना के कारण मुनस्यारी साहसिक पर्यटन का केंद्र भी है. यह स्थान नामिक ग्लेशियर, मिलम ग्लेशियर, रालम ग्लेसियर के लिए ट्रैकिंग के साथ- साथ पंचाचूली और नंदा-देवी आदि पर पर्वतारोहन का प्रारंभिक स्थल भी है.

Beautiful Munsyari | अगर आप खूबसूरत फूलों और अलग-अलग किस्म के देशी-विदेशी पक्षियों के बीच कुछ समय बिताना चाहते है, जैव विविधता और प्राकर्तिक सामजस्य को समझने और एक अलग किस्म के परस्थितिक माहौल में घूमना पसंद करते है तो मुनस्यारी जाये, आपको पर्यटन स्थल के चुनाव पर गर्व होगा.


मुनस्यारी के घूमने योग्य स्थान (Place to visit)

  • बिर्थी फाल (Birthi Fall Munsiyari)- विर्थी फाल तेजम से 14 किलोमीटर दूर मुख्य थल-मुनस्यारी रोड पर स्थित एक बहुत बड़ा और खूबसूरत झरना है. घने जंगलों के बीच स्थित इस झरने से हिमालय पर्वतों के विहंगम दृश्य को देखा जा सकता है. विर्थी फाल की प्राकर्तिक छठा को देखने हर साल यह हजारों देशी-विदेशी पर्यटक आते है. मुनस्यारी से विर्थी फाल की दूरी लगभग ३४ किलोमीटर है. खूबसूरत स्थल “मदकोट गाँव” जाते या आते हुवे भी आप विर्थी फाल जा सकते है. कालामुनी पास से १७ किलोमीटर की यात्रा तय करने के बाद आप विर्थी फाल पहुचेंगे.
  • कालामुनी मंदिर (Kalamuni Top/Temple Munsiyari)– मुनस्यारी यात्रा में कालामुनी मंदिर का खासा महत्व है. यह मंदिर आपकी यात्रा को धार्मिक स्पर्श देता है. देवी कलिका को समर्पित इस मंदिर में आप कलामुनी बाबा की मूर्ति के आलावा देवी- देवताओं के पुराने चिन्ह देख सकते है. कालामुनी मंदिर समुन्द्र तल से लगभग 9500 फीट की ऊंचाई स्थित है. चित्त-शांति और धनात्मक अध्यात्मिक शक्ति के लिए यह बेहतरीन स्थल है साथ ही यहाँ से विहंगम पंचाचूली के दर्शन भी किये जा सकते है. विर्थी फाल आते या जाते हुवे भी आप कालामुनी मंदिर जा सकते है. मुनस्यारी से विर्थी फाल की दूरी लगभग १४ किलोमीटर है. आप बस, टैक्सी या फिर निजी वाहन से कालामुनी मंदिर की यात्रा कर सकते है.
  • माहेश्वरी कुंड (Maheshwari Kund Munsiyari)- माहेश्वरी कुंड मुनस्यारी शहर से थोड़ी ही दूर मुनस्यारी मदकोट रोड पर स्थित है. माहेश्वरी कुंड बड़े पैराणिक महत्व का एक खूबसूरत तालाब है. कहा जाता है कि कभी यक्ष यहाँ निवास किया करते थे. यक्ष को यहीं की एक बालिका से प्रेम हो गया था, मगर गाँव वालों ने उनकी शादी नहीं होने दी तथा  यक्ष के रहने के स्थान पर पानी को भी सुखा दिया गया. यह देखकर यक्ष नाराज हुवे और उन्होंने गाँव वालों को श्राप दिया कि पूरे गाँव में सूखा पड़ जायेगा. इसी कारण अनेकों वर्षों तक सूखे की मार झेलने पर गाँव वालों ने यक्ष से माफ़ी मांगी तो सूखा ख़त्म हुवा. मुनस्यारी के बहुत नजदीक होने के कारण आप मुनस्यारी से बहुत कम समय में माहेश्वरी कुंड पहुंच सकते है.
  • थामरी कुंड (Thamri Kund Munsiyari)–  मुनस्यारी से 10 किलोमीटर पहले घने जंगलों के बीच स्थित थामरी कुंड एक सुंदर तालाब है. इस तालाब का भी धार्मिक महत्त्व है. कभी जब बारिस कम होती है तो स्थानीय लोग थामरी कुंड पहुच कर बारिस के लिए पूजा- पाठ करते है. थामरी कुंड अपने अन्दर समेटी हुवी शांति और स्वछंदता के कारण ट्रैकरों और पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र है. यहाँ से बर्फ में ढके हुवे हिमालयी पर्वतों का विहंगम दृश्य साफ़ देखा जा सकता है. यह स्थान भी मुनस्यारी- मदकोट रोड पर पड़ता है. बस, टैक्सी या फिर निजी वाहन थामरी कुंड यात्रा के लिए उत्तम है.
  • नंदा देवी मंदिर (Nanda Devi Temple Munsiyari)– समुन्द्र तल  से 7500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मुनस्यारी का नंदा देवी मंदिर मुख्य मुनस्यारी शहर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर है. आकार में छोटा यह मंदिर, मान्यता के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण है. न सिर्फ स्थानीय बल्कि बाहरी पर्यटक भी यहाँ खूब आते है. हिमालय के खूबसूरत दृश्य देखने एवं पंचाचूली पर्वत के दर्शन के लिए यह स्थान मुनस्यारी में सबसे अच्छे स्थलों में से एक है. मुनस्यारी- मदकोट रोड पर मुनस्यारी से तीन कीलोमीर यात्रा के बाद मुख्य सड़क से लगभग 200 मीटर के पैदल ट्रैक पार करके नंदा देवी मंदिर पहुचा जा सकता है.
munsiyari
  • पंचाचूली शिखर (Panchachuli Peak Munsiyari)– पंचाचूली पर्वत मुनस्यारी के प्रमुख आकर्षणों में से एक है. पांच शिखरों से मिलकर बना यह पर्वत पैराणिक महत्व तो रखता ही है, साथ ही साहसिक पर्यटन के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है. 6334 मीटर से लेकर 6904 मीटर तक ऊँची ये पांच बर्फ से ढकी हुवी चोटियां पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर खीचती है. पिथौरागढ़ पंचाचूली पर्वत बेस की दूरी लगभग 138 किलोमीटर है. पूर्व की तरफ से सोना ग्लेशियर तथा पच्शिम की तरफ से उत्तरी बालती ग्लेशियर होते हुवे पर्वतारोही पंचाचूली शिखर की यात्रा करते है.
  • मुनस्यारी संग्रहालय (Tribal Heritage Museum Munsiyari)–  मुनस्यारी एक ट्राइबल बाहुल्य इलाका है. यहाँ के ट्राइबल सास्कृतिक तौर पर काफी ऊँचे दर्जे के लोग है. ये लोग अपनी जीवन शैली ओर विरासत को बचाकर रखना अपनी शान समझते है, ट्राइबल हैरिटेज म्यूजियम इन ट्राइबल लोगों के इसी शान का एक उदाहरण है. मुख्य मुन्सियारी शहर से मात्र 2 किलोमीटर दूर नन्सैन्न गाँव के सुरेंदर सिंह पांगती जी के घर में स्थित यह निजी संग्रहालय  उनके  अथक प्रयासों और अपनी विरासत के प्रति उनकी लगन का नतीजा है. इस संग्रहालय में भोटिया जनजाति के लोगों की पारम्परिक जीवन शैली और विरासत को बड़े ही करीने से सहेजा गया है. भोटिया जनजाति के लोगों के पारंपरिक श्रंगार का सामान, रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाली चीजें जैसे कि मड-पेन, लकड़ी से बने कटोरे और खाने के बर्तन, भोटिया लोगों के पारम्परिक हुक्के आदि प्रमुख है. मुनस्यारी से बस, टैक्सी या फिर निजी वाहन से इस संग्रहालय पहुचा जा सकता है.

ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग एक्सपीडिशन-

(Trekking and Mountaineering Expedition in Munsiyari)

अगर आप ट्रैकिंग एक्सपीडिशन या माउंटेनियरिंग के शौकीन है तो मुनस्यारी आपके लिए आपके सपनों  के मंजिल की तरह साबित हो सकता है. मुनस्यारी में पड़ने वाले ग्लेशियर और बुग्याल नैसर्गिक सौन्दर्य की मिसाल तो है ही, साथ ही घूमने फिरने के शौकीन लोगों के लिए भी बेहतरीन विकल्प है. यहाँ पर ट्रैकिंग एवं अन्य साहसिक खेल तुलनात्मक तौर पर अन्य भारतीय साहसिक पर्यटक स्थलों से कम खर्चीले और गुणात्मक तौर पर ज्यादा बेहतर है. मुनस्यारी में आप घूमने-फिरने, कुदरती सौन्दर्य का आनंद लेने के साथ- साथ साहसिक पर्यटन के अपने सपने को भी पूरा कर सकते है.

  • ग्लेशियर (Glaciers of Munsiyari)   हिमालय की गोद में बसे होने के कारण मुनस्यारी ओर पिथौरागढ़ के आस- पास अनेकों छोटे- बड़े ग्लेशियर है. जिसमे से मिलम ग्लेशियर, रालम ग्लेश्यर, काली ग्लेशियर, नामिक ग्लेशियर, पोंटिंग ग्लेशियर, हीरामणि ग्लेशियर, पिनोरा ग्लेशियर आदि प्रमुख है. मुनस्यारी से लगभग 43 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद मिलम ग्लेशियर पहुचा जा सकता है. गर्मियों में मई से अक्तूबर तक के महीने में यहाँ देश-विदेश के हजारों ट्रैकर चलते रहते हैं.
  • बुग्याल (Bugyals of Munsiyari)- मुनस्यारी यात्रा के दौरान पर्यटक बुग्यालों की यात्रा का आनंद ले सकते है. ऊँचे पहाड़ों पर चढाई करने के बाद हरे- भरे घास के बड़े- बड़े मैदान घुमक्कड़ों के लिए कुदरत का अदभुत उपहार है. खलिया टॉप मुनस्यारी में पड़ने वाले बुग्यालों में सबसे नजदीकी बुग्याल है. इसके अलावा रुई बुग्याल, गैरधार बुग्याल, बनिक बुग्याल, कालामुनी और रातापानी आदि बुग्याल अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते है. बुरांस, तिमिस जैसे खूबसूरत फूलों ओर पेड़-पौधों के बीच बसे इन बुग्यालो पर आप कस्तूरी मृग मोनाल पक्षी आदि के साथ कुदरत की गोद में होते है.

कैसे पहुचें मुनस्यारी (How to Reach Munsiyari)

  • मुनस्यारी पहुचने के लिए आप भारत के अलग- अलग शहरों से पंतनगर, हल्द्वानी (काठगोदाम) तक लगभग हर तरह के यात्रा साधनों से पहुच सकते है. काठगोदाम के बाद पहाड़ी रास्ता शुरू हो जाने के कारण सड़क मार्ग ही आगे की यात्रा के लिए उपलब्ध है. काठगोदाम तक आप रेल मार्ग या फिर बस द्वारा भी पहुच सकते है. अगर आप हवाई मार्ग से यात्रा करना चाहते है तो आपको निकटतम एयरपोर्ट पंतनगर आना होगा. पंतनगर एअरपोर्ट मुनस्यारी से लगभग 310 कोलोमीटर दूर है. दिल्ली, देहरादून से सप्ताह के सातों दिन सीधी उड़ान सेवा उपलब्ध है. काठगोदाम तक की यात्रा आम तौर पर हर तरह से एक साधन- सुलभ यात्रा है.
  • काठगोदाम से आगे पहाड़ी यात्रा शुरू होती है. यह यात्रा आप सरकारी बसों के साथ- साथ निजी वाहन या फिर टैक्सी से भी तय कर सकते है. काठगोदाम से मुनस्यारी की यात्रा पहाड़ी प्रदेश में घूमने के आपके उद्देश्य को पूरा कर देगी. पूरा का पूरा रास्ता ही ख़ूबसूरत पर्यटन स्थलों से भरा पड़ा है. काठगोदाम से 20 किलोमीटर चलने के बाद सबसे पहले एक बेहद ही सुन्दर स्थान एवं तालों का शहर भीमताल आता है. उसके बाद फलों और फूलों का शहर भवाली, अल्मोड़ा होते हुवे शेराघाट से आप मुनस्यारी पहुच सकते है. काठगोदाम से मुनस्यारी के बीच की दूरी लगभग 280 किलोमीटर है. तो चलिए मुनस्यारी, आपकी ये यात्रा बेहद ही खूबसूरत होने वाली है.

कब जाये(Best Time to Visit Munsiyari)

मुनस्यारी घूमने के लिए आप जब कभी भी वहां के मौसम का मिजाज सही हो जा सकते है. मगर सबसे बेहतरीन समय मई से अक्तूबर के मध्य का है. गर्मियों के मौसम में यहाँ का तापमान एकदम सामान्य रहता है. और सड़क मार्ग के टूटने का खतरा भी कम रहता है. हालाँकि सर्दियों में भी बहुत सारे पर्यटक मुनस्यारी जाते है. जो लोग बर्फ का आनंद लेना चाहते है वो सर्दियों में मुनस्यारी जा सकते है, मगर सर्दियों में ठण्ड से बचने के उपायों के साथ जाना पड़ता है.

ध्यान में रखने योग्य बाते (Thing to Note Before Munsiyari Trip)

मुनस्यारी यात्रा के दौरान वहां के मौसम और भोगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुवे यात्रा से पहले कुछ बिन्दुओं पर विचार करना जरुरी है.

  • मुनस्यारी में मौसम ठंडा रहता है, ग्रीष्म रितु में भी रात्रि के समय ठण्ड का सामना करना पड़ सकता है. अतः गर्म कपडे साथ में रखना बुद्दिमानी है.
  • पर्वतीय छेत्र होने की वजह से आपको ट्रैकिंग के दौरान छोटी- मोटी परेसनियों से बचने के लिए ट्रैकिंग शूज और पहनने के लिए ट्रैक- शूट होना जरुरी है.
  • ब्लड-प्रेसर के मरीजों को अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुवे यात्रा की सलाह दी जाती है.
  • पहाड़ी रास्तों में ट्रैकिंग में चलते- चलते कई बार शाम होने की वजह से अधेरा हो जाता है, इसलिए टार्च- लाइट होना जरुरी है.
  • पहाड़ों में पैदल चलते समय कम वायु दवाब के कारण उल्टी और जी मिचलाने की समस्या आम हो होती है, इसलिए जरुरी दवा और ओ आर एस घोल साथ में रखना ठीक है.

आस – पास के अन्य पर्यटक स्थल (Other Tourist Places Near Munsiyari)

मुनस्यारी की यात्रा के साथ- साथ आप चाहे तो कुमाऊ के अन्य पर्यटक स्थलों की यात्रा पर भी जा सकते है. रानीखेत, नैनीताल, भवाली, भीमताल, चम्पावत, पिथौरागढ़ जैसे अलग- अलग स्थल अपनी अलग- अलग विशेषताओं के लिए जाने जाते है. इसके अलावा आप धार्मिक स्थलों की यात्रा करना चाहते है तो आपके पास अनेकों बेहतरीन विकल्प है. आप टनकपुर स्थित माता पूर्णागिरी मंदिर, चम्पावत स्थित बालेश्वर मंदिर, रानीखेत स्थित बिनसर महादेव, अल्मोड़ा स्थित चितई गोलू देवता मंदिर, जागेश्वर मंदिर, काठगोदाम से मुनस्यारी वाया अल्मोड़ा जाते हुवे नीम करोली बाबा जी का कैंची धाम मंदिर (Kainchi Ashram)आदि अनेकों धार्मिक स्थलों की यात्रा कर आशीर्वाद हासिल कर सकते है.

इसके आलावा चम्पावत स्थित मायावती आश्रम और अल्मोड़ा- बागेश्वर रस्ते में पड़ने वाला बिनसर सेंचुरी, रामनगर स्थित जिम कार्बेट नेशनल पार्क आदि पर्यटन स्थान भी पर्यटकों को काफी आकर्षित करते है.

By HindiWall

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