दो शब्द

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  दो शब्द

” गरीब माँ “……………

ये दो शब्द जिन पे कविता करना बहुत कठिन है ..
हजारों मील रेगिस्तान पर अकेले चलने से भी ज्यादा कठिन

जब अपनी नन्हीं बिटिया को लेकर जाती होगी वो बाजार
समझ पाना कुछ भी उसके मन का…शब्दों मै..
एक भी शब्द छांट पाना कविता के लिए बहुत कठिन है

वो बेलचा चलाती होगी किसी के मकान की नीव के लिए ..
उस नन्ही बिटिया का एक पैर बांध कर अपने सपनों के खूटें से
उसके सपनों से एक छोटी सी झलक चुरा पाना बहुत कठिन है…

जब कपडे खरीदती होगी अपनी बिटिया के लिए दुकान से ।
बिटिया की जिद्द पूरी कर सच कर लेती होगी…अपने ख्वाब भी ..
उसकी खुसी पर एक शब्द भी लिख पाना बहुत कठिन है

दिन भर की मजदूरी से थक-हारकर जब सो जाती होगी
बिटिया को छाती से लगाकर ..
नहीं हो सकता कायनात के पास ऐसे दृश्य के लिए कोई शब्द
अब समझा लिख पाना .. कविता कठिन नहीं…असम्भव है.


हिन्दीवाल के लिए कविता “दो शब्द”  के लेखक का नाम रोहित गड़कोटी है. अल्मोड़ा (उत्तराखंड) में रहते है. हिन्दीवाल ब्लॉग में संपादन का कार्य भी करते है.ma par kavita

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