पूर्णागिरि मंदिर | HISTORY OF PURNAGIRI TEMPLE (PURNAGIRI MANDIR)

Purnagiri Mandir

Purnagiri Mandir | माता पूर्णागिरि मंदिर  उत्तराखंड  के  चम्पावत जिले में टनकपुर नामक सीमान्त कस्बेसे  लगभग 20 किलोमीटर उत्तर की तरफ, समुद्र तल से ३००० मीटर की ऊचाई पर स्थितअन्नपूर्णा नामक शिखरपरस्थित है.

 108 सिद्द पीठों में से एक पूर्णागिरि मंदिर (Purnagiri Mandir ) का एक महान पैराणिक इतिहास है.  मान्यता है कि दक्षप्रजापति की कन्या तथा भगवान शिव की पत्नी सती की नाभि भगवान विष्णु के चक्र से कटकर इसी स्थान पर गिरीथी.  इसीलिए हर साल लाखो भक्त देश विदेश से तरह- तरह की मनोकामना लेकर यहां आते है.

माँ पूर्णागिरि मंदिर का इतिहास

History of Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

शिव पुराण में रुद्र-सहिंता के अनुसार, राजा दश प्रजापति की कन्या सती का विवाह भगवान शिव के साथ हुवा था. कहा जाता है कि ब्रम्हा पुत्र दश प्रजापति  ने एक बार एक विशाल यज्ञ किया था था. जिसके लिए उन्होंने सभी देवी- देवताओं और ऋषिओं को निमंत्रित किया था. परन्तु भगवान शिव को किसी पूर्वाग्रह की वजह से अपमानित करने की दृष्टि से निमंत्रण नहीं दिया. जिसे पार्वती (सती) ने भगवान शिव का घोर अपमान समझा और यज्ञ की वेदी में अपनी देह की आहुति कर दी.

भगवान शिव यह जानकर बहुत ही क्रोधित हो गए. और अपनी पत्नी के जली हुवी देह को लेकर आसमान में विचरण करते हुवे तांडव करने लगे. भगवान शिव का तांडव देखकर सारे देवी देवता परेशान हो गए और भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगे. भगवान विष्णु ने चिंतित होकर अपने चक्र से  भगवान शिव द्वारा हाथ में लिए गए माता  सती की देह के अलग- अलग हिस्से  कर दिए. अलग अलग हिस्से अलग- अलग जगहों में गिरे. और जहां-जहां भी गिरे वहां- वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुवी.

इन्ही हिस्सों में से एक हिस्सा जो कि माता सती की नाभि का था, अन्नपूर्णा पर्वत शिखर में जा कर गिर गया. कालान्तर में यह स्थान पूर्णागिरि कहलाया. (Purnagiri Mandir) माता पूर्णागिरि मंदिर में देवी के नाभि की पूजा की जाती है.

पूर्णागिरि मंदिर कैसे पहुंचे

How to Reach Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 342 किलोमीटर दूर उत्तराखंड का टनकपुर  शहर माँ पूर्णागिरि मंदिर जाने के लिए आखिरी पड़ाव है. दिल्ली से टनकपुर पहुंचने के लिए ज्यादातर लोग सड़क मार्ग का प्रयोग करते है. टनकपुर पहुंचने के के लिए सबसे बेहतरीन साधन उत्तराखंड रोडवेज की बसें है. जो की आनंद विहार काउंटर नंबर 160 पर लगभग पूरे  दिन उपलब्ध रहती है. इसके अलावा  भारतीय रेल के द्वारा टनकपुर स्टेशन पर पहुंचा जा सकता है. भारतीय रेल की दिल्ली से कोई सीधी सेवा तो नहीं है मगर रुद्रपुर तक या फिर हल्द्वानी या काठगोदाम तक भारतीय रेल से यात्रा संपन्न की जा सकती है.  काठगोदाम से टनकपुर की यात्रा निजी वाहन से  या फिर उत्तराखंड रोडवेज की बस से पूरा किया जा सकता है.

लखनऊ से पूर्णागिरि की यात्रा

Journey From Lucknow To Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

लखनऊ से पूर्णागिरि पहुंचने के लिए भी  पहले टनकपुर पहुंचना पड़ेगा. और टनकपुर पहुंचने के सबसे उपयुक्त साधन भारतीय रेल है जो सप्ताह के सातों दिन उपलब्ध है. हालाँकि उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड रोडवेज की बसे भी इस यात्रा के लिए उपलब्ध है.

हवाई मार्ग

By Air

आप देश भर की अलग- अलग जगहों से उत्तराखंड के उधमसिंघ नगर स्थित पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचकर, निजी या फिर उत्तराखंड रोडवेज की बसों से टनकपुर (Purnagiri Mandir)  तक पहुंच सकते है.

टनकपुर से पूर्णागिरि मंदिर

Tankpur To Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

टनकपुर शहर जो की उत्तराखंड के चम्पावत जिले का हिस्सा है. (Purnagiri Mandir)  माँ पूर्णागिरि के भक्तों का मुख्य पड़ाव होता है.  बेहद खूबसूरत वनाचाद्दित पहाड़ियों की गोद में बसा छोटा सा शहर टनकपुर माँ पूर्णागिरि के आशीर्वाद की तरह प्रतीत होता है. टनकपुर पहुंचने के बाद पूर्णागिरि पहुंचने के लिए  टनकपुर से  आगे 17  किलोमीटर की दूरी अलग- अलग तरह के निजी वाहनों या फिर उत्तराखंड परिवहन की बस से तय की जा सकती है. जबकि अंतिम 3 किमी की यात्रा पैदल करनी पड़ती है, जिसमे खड़ी पहाड़ी के ऊपर चढ़ना पड़ता है. और इस तरह हम पहुंचते है माँ पूर्णा के दरबार पूर्णागिरि मंदिर.

माँ पूर्णागिरि मेला

Fair and Festival at Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

माँ पूर्णागिरि मंदिर में लगभग वर्ष के 12  महीने भीड़ रहती है. मगर चैत्र की नवरात्रियों में यहाँ एक बड़े मेले का आयोजन होता है जो जून आखिरी तक चलता रहता है. मेले की प्रशासनिक  जिम्मेदारी चम्पावत जिला पंचायत की होती है. प्रशासन श्रद्धालुुओं  की हर तरह से सुविधा हेतु मौजूद रहता है. लगभग तीन माह तक चलने वाले इस मेले में हर साल लगभग 25 से 30 लाख श्रद्धालु  देश विदेश से  दर्शन के लिए माँ पूर्णागिरि के दरबार में पहुंचते है. टनकपुर शहर में (Purnagiri Mandir) मेले के समय बहुत भीड़ भाड़ रहती है.

मान्यताये एवं किवदंतियां

Belief and Stores of Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

लोग छोटे बच्चों का मुंडन संस्कार के लिए माँ पूर्णागिरि मंदिर आते है. माँ पूर्णागिरि मंदिर के सम्बन्ध में मान्यता है कि, जो भी श्रद्धालू यहां पूर्ण निष्ठा एवं विश्वास के साथ आता है उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है. लोग मंदिर के रस्ते में उगी घास पर गाँठ बांधकर मनौती मांगते है और जब मनोकामना पूरी होती है तो दुबारा आकर गाँठ को खोलते है. कुछ लोग चुनरी लेकर भी गाँठ बांधते और खोलते है.

(Purnagiri Mandir)  माँ पूर्णागिरि के दरबार के थोड़ा ही ऊपर एक चोटी और है, जिस पर चढ़ना शुभ नहीं माना जाता. वहां मौजूद पुजारी लोग इस बात के लिए मना करते है. कहा जाता है एक बार एक साधु नहीं माना और इस टिकरी पर चढ़ाई करने लगा.  माँ पूर्णागिरि ने उसे नीचे शारदा में फैक दिया. चूँकि वह श्रदालु माता का अनन्य भक्त था.  इसलिए माता ने उसे आशीर्वाद दिया कि तू आज से सिद्द बाबा के नाम से जाना जायेगा और जो भी मेरे दर्शन के लिए आएगा वो तेरे भी दर्शन करेगा. तब से अब तक जो भी माँ पूर्णागिरि मंदिर दर्शन के लिए जाता है उसे  सिद्ध बाबा के दर्शन हेतु जाना पड़ता है.

झूठे मंदिर कि कहानी

Story of Jhutha Mandir at Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

किवदंती है कि एक बार एक सेठ व्यक्ति ने माँ के दरबार (Purnagiri Mandir)  में आकर पुत्र प्राप्ति हेतु वर माँगा, और कहा कि वचन दिया की पुत्र प्राप्ति के बाद वह सोने का मंदिर चढ़ाएगा. पुत्र प्राप्ति के बाद लोभवश उसने तांबे का मंदिर बनाकर उसको सोने की पालिश चढ़ा दी और चढ़ावे के लिए ले आया. मगर दुन्यास नामक स्थान पर आने के बाद वो उस मंदिर को आगे न ला सका. इस तरह इस तांबे के मंदिर का नाम झूठा मंदिर पड़ गया.

पूर्णागिरि मंदिर में पूजा अर्चना हेतु सामग्री

Essential Items for Veneration At Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

माँ  पूर्णागिरि मंदिर में चढ़ावे का रिवाज भी कमोबेश अन्य मंदिरों कि तरह ही है. मगर इस मंदिर में चढ़ावे के लिए, नारियल एवं चुनरी का विशेष महत्व है. चढ़ावे हेतु लोग अपनी मनोकामना के हिसाब से सामग्री लाते है. स्त्रियां श्रृंगार का सामान चढ़ावे के रूप में लेकर आती है. सामान्य तौर पर नारियल, चुनरी, प्रसाद, धूप, अगरबत्ती आदि चढ़ावे के लिए दिया जाता है. मंदिर के आस-पास बहुत सी छोटी-बड़ी दुकाने, प्रसाद एवं अन्य जरुरी वस्तुए बेचते हुवे मिल आपको जायेंगे. इसलिए प्रसाद के लिए किसी श्रदालु को ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं है.

 ध्यान रखने योग्य बातें.

Things To Note at Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

पूजा अर्चना कि सामग्री लेकर मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद वहां मौजूद पुजारियों के माध्यम से पूजा अर्चना सम्पन की जाती है. मेले के समय में भीड़ ज्यादा होने  के कारण और मुख्य मंदिर परिसर कि जगह बहुत सकरी और कम होने के कारण पूजा अर्चना के लिए समय ज्यादा नहीं मिल पाता. अतः कोई विशेष पूजा या पाठ करने का मन बना रहे हों तो नवरात्रि के बाद या आगे- पीछे कभी भी जा सकते है

पूर्णागिरि मंदिर के आस-पास ठहरने के लिए होटल

Hotels Near Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

(Purnagiri Mandir) पूर्णागिरि मंदिर के दर्शनाभिलाषी भक्तों के ठहरने के लिए टनकपुर में अनेक होटल और एक धर्मशाला है. मेले के समय से होटलों में काफी भीड़ रहती है. उचित किराये के साथ अच्छी सुविधाओं के लिए  पंचमुखी धर्मशाला है जो कि टनकपुर में शारदा के किनारे स्थित है

पूर्णागिरि मंदिर में दर्शन करते हुवे आस- पास के अन्य दर्शनीय स्थल

Other Tourist Places Near Purnagiri Temple (Purnagiri Mandir)

माँ  पूर्णागिरि के दर्शन करते हुवे  आस- पास अन्य दर्शनीय स्थान- टनकपुर शहर अपने आप में एक दर्शनीय शहर है. इसके अलावा सिद्द बाबा का मंदिर भी आस- पास ही स्थित है. अगर आप दो तीन दिन और लगा सकते है तो टनकपुर से 75 किलोमीटर दूर स्थित चम्पावत शहर, चम्पावत स्थित बालेश्वर मंदिर, लोहाघाट के मायावती स्थित स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित अद्वैत आश्रम आदि बहुत ही सुन्दर और ऐतिहासिक स्थान है.

चम्पावत के सिक्खों का पवित्र  धार्मिक स्थल गुरुद्वारा श्री  रीठा साहिब भी है जो कि चम्पावत लगभग 70 अल्मोड़ा जाने वाले रस्ते में पड़ता. इसके अलावा एक सिक्खों का ही एक बेहद ही प्रसिद्द धार्मिक स्थल श्री नानकमत्ता साहिब भी टनकपुर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी में हल्द्वानी वाली रोड में स्थित है

 Purnagiri Mandir By HinDiwall

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