माँ वैष्णो देवी | इतिहास | कैसे पहुचें | MATA VAISHNO DEVI MANDIR | HISTORY AND HOW TO REACH GUIDE

Vaishno Devi Mandir Yatra | हिन्दू धर्म में माँ वैष्णो देवी मंदिर एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. वैष्णो देवी मंदिर में लाखों लोग हर साल दर्शन करने आते है. पूरे वर्ष न सिर्फ हिंदुस्तान से बल्कि अन्य देशों से भी तीर्थयात्री इस मंदिर की यात्रा करके अपनी मनोकामना पूर्ण करते है. ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर हिंदुस्तान के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. माता वैष्णो देवी को “वैष्णवी माता” और “माता रानी” के नाम से भी जाना जाता है. हमारा देश मंदिर और तीर्थस्थलों का देश है. पूरे देश में अनेकों महान और विश्व-विख्यात मंदिर है, मगर जम्मू एवं कश्मीर राज्य के त्रिकुट पर्वत पर स्थिति माता रानी का यह मंदिर अपने आप में खास है. तीर्थयात्रियों की संख्या के आधार पर माँ वैष्णो देवी मंदिर भारतवर्ष के सबसे बड़े धार्मिक तीर्थस्थलों में शामिल है.

वैष्णो देवी मंदिर (Vaishno Devi Mandir Darshan)

(Vaishno Devi Mandir) – “माँ वैष्णो देवी मंदिर” भारत के जम्मू कश्मीर राज्य के रियासी जिले में स्थित कटरा नगर से लगभग 13 किलोमीटर दूर, समुद्र तल से 1550 मीटर ऊँची “त्रिकुट” नामक पहाड़ी पर अवस्थित है. कटरा से लगभग 13 किलोमीटर की यात्रा के बाद एक गुफा में विराजमान माता वैष्णो देवी का यह निवास स्थान भारतवर्ष के 108 शक्ति पीठों में से एक है. माता रानी के मुख्य मंदिर को भवन के नाम से भी जाना जाता है. भवन में स्थित गुफा में माता रानी एक पिंड के रूप में विराजमान है. यह पिंड माँ काली (दाई तरफ), माँ सरस्वती (मध्य में) और माँ लक्ष्मी (बाई तरफ) का सम्मलित रूप है. इन तीनों रूपों से बने इस पिंड को “माँ वैष्णो देवी” का रूप कहा जाता है. मुख्य मंदिर में इन तीन पिंडों के आलावा जम्मू कश्मीर के पूर्व नरेशों और भक्तों द्वारा स्थापित मुर्तिया और यंत्र आदि मौजूद है.

माता वैष्णो देवी मंदिर का पैराणिक इतिहास

(History of Vaishno Devi Mandir In Hindi)

(Mata Vaishno Devi Mandir In Hindi)  पैराणिक हिन्दू धर्मग्रथों के अनुसार, संसार में धर्म की हानि होने  और अधर्म का का प्रभाव बढ़ने के कारण आदिशक्ति ने त्रेतायुग में ‘सत’, ‘रज’ और ‘तम’ के तीन रूपों महा-सरस्वती, महा-लक्ष्मी, और महा-दुर्गा के सामूहिक बल से धर्म की रक्षा के लिए एक कन्या प्रकट की. कहा जाता है कि माँ वैष्णो देवी ने इसी कन्या के रूप में दक्षिण भारत के समुंद्री तट पर स्थित रामेश्वरम में एक संतानहीन परिवार के घर में जन्म लिया. माँ वैष्णो देवी के बचपन का नाम त्रिकुटा था. भगवान् विष्णु के वंश में जन्म लेने के कारण उनका नाम वैष्णो पड़ा. रत्नाकर सागर को उनका लौकिक पिता माना जाता है, कहा जाता है कि रत्नाकर सागर ने देवी बालिका के जन्म से पहले एक वचन लिया था कि वो अपनी होने वाली संतान की इच्छाओं का सम्मान करेंगे और कभी भी उनके खिलाप नहीं होंगे.

जब त्रिकुटा सिर्फ 9 वर्ष की थी तब उन्होंने अपने लौकिक पिता श्री रत्नाकर सागर के सम्मुख समुद्र किनारे जाकर तपस्या करने की इच्छा जताई. इस तपस्या का उद्देश्य भगवान श्रीराम को पति रूप में प्राप्त करना था. श्री रत्नाकर सागर ने अपने वचन के वसीभूत उन्हें आज्ञा दे दी और पिता की आज्ञा पाकर बालिका देवी त्रिकुटा समुद्र किनारे भगवत तपस्या में लींन हो गई. (Vaishno Devi Ka Mandir)

इसी बीच एक दिन विष्णु अवतार “भगवान श्री राम” माता सीता की ख़ोज करते हुवे समुद्र किनारे पहुचे. उनकी द्रष्टि तपस्या में लीन इस दिव्य बालिका पर पड़ी. देवी त्रिकुटा ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम से कहा कि वो उनको अपना पति मान चुकी है. यह सुनकर भगवान् श्री राम ने कहा कि इस अवतार में उनकी धर्मपत्नी सिर्फ “सीता जी” ही है, और वो उनके प्रति ही पति के रूप में पूर्ण निष्ठावान है.

भगवान् श्रीराम ने देवी त्रिकुटा को वचन दिया और कहा कि वो कलयुग में कल्कि अवतार लेकर उनसे जरूर विवाह करेंगे. तब तक वो उत्तर भारत में स्थित माणिक पहाड़ियों के बीच त्रिकुट नामक पर्वत में तपस्या करे और भक्तों के कष्टों का नाश कर जगत कल्याण करती रहें. भगवन श्री राम ने कहा एसा करने से पूरी दुनिया में उनकी पूजा की जाएगी तथा वो “माता वैष्णो देवी” के नाम से विश्व- विख्यात हो जाएँगी.

माँ वैष्णो देवी | कथाएं (Vaishno Devi Story In Hindi)

ब्राह्मण श्रीधर कथा ( Story Of Pandit Sridhar | Vaishno Devi Mandir)- कहा जाता है कि श्रीधर नाम का एक बहुत ही गरीब ब्राहमण माँ वैष्णो देवी का बड़ा भक्त था. श्रीधर का परिवार “वर्तमान के कटरा नगर” से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित “हंसली” नामक गाँव में रहता था. एक बार नवरात्री में कन्या पूजन के अवसर पर माँ वैष्णो देवी पंडित श्रीधर के घर आ गई. पूजा – पाठ ख़तम होने के पश्चात अन्य लोग तो चले गये मगर कन्या रूपी माँ वैष्णो देवी वही रुकी रही. उन्होंने पंडित श्रीधर से भंडारे का आयोजन करने के लिए कहा. पंडित श्रीधर ने भंडारा करने के लिए निकटतम गाँवों के लोगों को आमंत्रित किया साथ ही गुरु गोरखनाथ और उनके शिष्य भैरवनाथ को भी इस आयोजन में आमंत्रित किया गया.

 गाँव के लोगों को पंडित श्रीधर के इस आयोजन के बारे में शंका होने लगी कि ये गरीब ब्राह्मण आखिर कैसे भंडारे का आयोजन करेगा. और ये दिव्य कन्या आखिर क्यों भंडारे का आयोजन करना चाहती है. भैरवनाथ ने पंडित श्रीधर को बहुत डराया और कहा कि अगर भंडारे के आयोजन में कोई कमी अथवा त्रुटी हुवी तो उसे गंभीर हानि हो सकती है. भैरवनाथ की बातों को सुनकर तथा गाँव के लोगों के वर्ताव को देख कर पंडित श्रीधर बहुत निराश हुवे और चिंता में डूब गए. (Maa Vaishno Devi Temple)

 इसी बीच भंडारे के समय माँ वैष्णो देवी उसी दिव्य बालिका के रूप में पंडित श्रीधर के सम्मुख पुनः प्रकट हुवी और कहा कि उन्हें निराश होने की बिलकुल जरुरत नहीं है. भंडारे की सारी व्यवस्था हो चुकी है, लोगों को आप अपनी छोटी सी कुटिया में बिठा दीजिये. इतना बोलकर वो कन्या एक दिव्य बर्तन से खुद ही लोगों को खाना परोसने लगी. इस तरह माता रानी की कृपा से भंडारे का आयोजन सम्मानपूर्वक संपन्न हो गया. यह सब देखने के बाद पंडित श्रीधर माँ वैष्णो देवी के और भी परम भक्त हो गये. उन्होंने त्रिकुट पर्वत स्थित उस गुफा में पहुच कर देवी माँ की पूजा अर्चना में ही अपना जीवन लगा दिया. माना जाता है कि माता वैष्णो देवी मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले पुजारी और पंडित श्रीधर के ही वंसज है.

भैरवनाथ की प्रसिद्द कथा (Story Of Bhaironath | Vaishno Devi Mandir) – भैरवनाथ जब पंडित श्रीधर द्वारा आयोजित भंडारे में पहुचा तो उनसे भंडारे के पवित्र भोजन को ग्रहण करने से मना कर दिया और मांस – मदिरा की मांग करने लगा. पंडित श्रीधर ने इस बात को लेकर असहमति जताई. मगर भैरवनाथ नहीं माना और आपनी मांग पर अडिग रहा, यह सब देखकर भंडारे में पहुची कन्या रूपी माँ वैष्णो देवी ने भी भैरवनाथ को उसके हठ को लेकर समझाने- बुझाने की बहुत कोसिश की, मगर भैरवनाथ ने एक न सुनी. उल्टा वो उस कन्यारुपी “माँ वैष्णो देवी” के पीछे भागने लगा. यह देख कर भंडारे में आई कन्या रूपी माता रानी को भैरोनाथ की नियत का आभास हो गया और वो हवा का रूप धरकर “त्रिकुट पर्वत” की तरफ चलीं गईं.

भैरवनाथ माँ वैष्णो देवी का पीछा करते हुवे गुफा के द्वार तक पहुच गया. यह देख माँ वैष्णो देवी ने हनुमान को बुलाकर कहा कि में नौ महीने तक इस गुफा के अन्दर तपस्या करुँगी तब तक तुम भैरोनाथ को गुफा में प्रवेश मत करने देना. भेरोनाथ गुफा के बाहर हनुमान जी से युद्ध करने लगा, यह देखने पर की हनुमान जी युद्ध करते- करते थक गये माता रानी ने काली का रूप धर त्रिकुट पर्वत में ही भैरवनाथ का संहार कर दिया. भैरोनाथ का सिर धड से अलग होकर, अर्धक्वारी गुफा से लगभग 7 कीलोमीटर तथा मुख्य मंदिर से 1.5 किलोमीटर दूर भैरो घाटी में जाकर गिरा.

मरते वक्त भैरोनाथ द्वारा क्षमा याचना करने पर माता रानी ने उसे वरदान दिया कि “जो भी इन्सान मेरे दर्शन को आएगा उसका दर्शन तभी पूर्ण होगा जब वो वो भैरवनाथ मंदिर के दर्शन करेगा”. तब से अब तक जो भी भक्त माँ वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाते है, भैरवनाथ मंदिर के दर्शन भी जरूर करते है.

मंदिर के अन्य दर्शनीय स्थल

  • बाणगंगा नदी (Banganga River | Mata Vaishno Devi Mandir) बाणगंगा नदी कटरा से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. कहा जाता है की हनुमान जी को एक बार प्यास लगने पर माता रानी ने अपने धनुष से पहाड़ पर बाण चलाकर एक जलधारा पैदा की थी. उसी पवित्र जलधारा को आज बाणगंगा के नाम से जाना जाता है.
  • चरण पादुका (Charan Paduka | Vaishno Devi Mandir) बाणगंगा से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद अर्धक्वांरी से 3.5 किलोमीटर  पहले ही एक शिला पर  माता रानी के पवित्र चरणों के निशान है जिन्हें चरण पादुका कहा जाता है. चरण पादुका के दर्शन कर भक्त माता रानी को प्रणाम करते है और आशीर्वाद लेते है . चूकी “चरण पादुका” यात्रा के रस्ते में ही है इसलिए  दर्शन में भी ज्यादा समय नहीं लगता. चरण पादुका के पास ही “माँ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड” की मेडिकल यूनिट भी है, जो आते-जाते भक्तों से सेवा के लिए हमेशा तैनात रहती है.
  • माँ वैष्णो देवी “अर्धक्वारी गुफा” (Ardhkuwari Cave | Vaishno Devi Mandir Yatra) बाणगंगा से लगभग 6 किलोमीटर दूरी पर पवित्र अर्धक्वारी गुफा है. अर्धक्वारी के बारे में मान्यता है कि, इस गुफा में माँ वैष्णो देवी ने 9 महीने तक तपस्या की थी. हनुमान जी ने इसी गुफा के बाहर नौ महीने तक माँ वैष्णो देवी की रक्षा की और भैरवनाथ को अन्दर नहीं आने दिया.
  • वैष्णो देवी स्थित भैरोनाथ मंदिर ( Bhairavnath Mandir | Maa Vaishno Devi Mandir) माता रानी ने महा शक्तिशाली काली का रूप धर कर जब भैरवनाथ का वध किया तो भैरोनाथ का मस्तक धड से अलग होकर पवित्र मंदिर से 1.5 किलोमीटर दूर भैरवघाटी नामक स्थान पर जाकर गिरा था. इसी स्थान पर भैरव नाथ का मंदिर बना है.

वैष्णो देवी मंदिर से संबंधित मान्यताएं-

(Beliefs Related Vaishno Devi Mandir) 

  • वैष्णो देवी से संबंधित अनेकों मान्यताएँ है. बाणगंगा के बारे में कहा जाता है कि हनुमान जी की प्यास बुझाने के लिए माता रानी ने बाणगंगा नदी को अवतरित किया और बाद में  उसमे अपने केश भी धोये थे. इसीलिए बाणगंगा के जल को बहुत पवित्र माना जाता है. ये मान्यता है कि जो भी भक्त बाणगंगा नदी के पवित्र जल से स्नान करता है उसकी सारी व्याधियां ख़त्म हो जाती हैं.
  • माँ वैष्णो देवी के दर्शन करने के बाद भैरवनाथ के दर्शन को जरुरी माना जाता है. कथानुसार माँ वैष्णो देवी ने स्वयं भैरवनाथ को ये वरदान दिया था कि जो भी भक्त मेरे दर्शन करने आएगा वो भैरोनाथ के दर्शन भी जरूर  करेगा. मान्यता है कि भैरोनाथ के दर्शन के बिना माँ वैष्णो देवी के दर्शन पूर्ण नहीं होते.
माता वैष्णो देवी ने भगवान् श्रीराम द्वारा रावण के विरुद्ध युद्ध में “श्रीराम सेना” की विजय हेतु नवरात्रों का आयोजन भी किया था. इसी सन्दर्भ को लेकर आज भी वैष्णो देवी मंदिर में नवरात्रों के समय “रामायण पाठ” का आयोजन किया जाता है.

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“वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा ” (Vaishno Devi Mandir Yatra)

(How To Reach Vaishno Devi) कहा जाता है कि माता रानी के बुलावे पर भक्त बड़ी आसानी से माँ वैष्णो देवी के मंदिर पहुच जाते है. भारतवर्ष के इस महत्वपूर्ण तीर्थस्थल तक पहुचने के लिए आपको यात्रा के सबसे पहले पड़ाव “जम्मू एवं कश्मीर” राज्य के “जम्मू” शहर पहुचना होगा.

vaishno devi mandir yatra
  • कैसे पहुचे जम्मू (How To Reach Jammu | Vaishno Devi Mandir) जम्मू पहुचने के लिए उत्तर भारत के लगभग हर प्रमुख शहर से ट्रेन, बस या फिर टैक्सी के द्वारा यात्रा की शुरुवात की जा सकती है. देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ आदि से हवाई मार्ग द्वारा भी जम्मू शहर पहुचा जा सकता है. गर्मियों के मौसम यात्रियों की संख्या ज्यादा होने के कारण भारतीय रेलवे द्वारा प्रतिवर्ष कुछ विशेष ट्रेनें दिल्ली से जम्मू के लिए चलाई जाती है. जम्मू एवं कश्मीर परिवहन द्वारा भी विशेस बसों का प्रचालन किया जाता है.
  • जम्मू से कटरा तक की यात्रा- (Jammu To Katra | Vaishno Devi Mandir) वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा का दूसरा पड़ाव जम्मू का कटरा क़स्बा है. जम्मू से कटरा तक की दूरी 50 किलोमीटर है, जिसे तय करने में 2 घंटे लगते है. जम्मू रेलवे स्टेशन से कटरा के लिए विशेस ट्रेन भी जाती है साथ ही जे & के परिवहन की बसों या फिर टैक्सी और निजी वाहन से भी कटरा पहुचा जा सकता है. जम्मू शहर के लगभग हर स्थान से आप टैक्सी किराये पर लेकर कटरा तक की यात्रा कर सकते है. अगर आप हवाई मार्ग से जम्मू एयरपोर्ट पहुचते है तो आपको जम्मू एअरपोर्ट पर जम्मू एवं कश्मीर परिवहन की बस या फिर टैक्सी मिल जाएगी जिसके जरिये आप कटरा पहुच सकते है. अगर आप अपना निजी वाहन लेकर चल रहे है तो भी आप कटरा तक आसानी से निजी वाहन से यात्रा कर सकते है. निजी वाहन से जाने वाले यात्री चाहे तो कुंजवनी से बाई-पास ले सकते है.
  • कटरा से माँ वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा (Katra to Vaishno Devi Mandir Yatra) कटरा से माता रानी के मंदिर तक पहुचने के लिए की जाने वाली यात्रा ही माता वैष्णो देवी मंदिर की वास्तविक यात्रा है. कटरा से आगे के यात्रा के लिए यात्रियों को यात्रा पर्ची  बनवानी पड़ती है. पर्ची लेने के बाद 3 घंटे के अन्दर ही आपको बाणगंगा स्थित जाँच केंद्र पहुचना होता है. यहाँ  पर सामान की जाँच के बाद ही आगे की यात्रा शुरू होती है.

याद रहे कि पर्ची लेने के 3 घंटे के अन्तराल में ही आप जाँच केंद्र पहुच जाये वरना पर्ची की वैधता समाप्त मानी जाती है. हो सके तो यात्रा प्रारंभ करने के कुछ समय पहले ही या अपनी सुविधानुसार पर्ची लें. ताकि निश्चित अवधि से पहले- पहले जाँच केंद्र पहुच कर यात्रा शुरू कर सकें. इसी यात्रा के दौरान अनेक जगहों पर क्लॉक रूम की सुविधा उपलब्ध है, यात्रियों को निश्चित शुल्क देकर अपना सामान क्लॉक रूम में जमा करवा देना चाहिए ताकि यात्रा करने में आसानी हो. यात्री दिन के समय कटरा में ही किसी धर्मशाला या फिर होटल में विश्राम कर सायं के समय यात्रा आरम्भ करते है. अधिकतर यात्री रात्रि के समय ही इस यात्रा को सुविधाजनक मानते है.

यात्रा मार्ग चयन-

  1. यात्रा का मुख्य मार्ग. (Main Route Of Vaishno Devi Mandir) माँ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के हाथों मंदिर देखभाल की जिम्मेदारी आने के बाद यात्रा मार्ग में काफी सुधार किये गये है. मुख्य रस्ते का काफी हिस्से को तीन शेड से कवर किया गया है ताकि बारिश के मौसम में यात्रियों को परेशानी का समाना न करना पड़े. मुख्य मार्ग पर जगह- जगह पानी के नल और वाटर कूलर लगे हुवे है. पूरे रस्ते अनेक जगह टॉयलेट और वाशरूम इत्यादि की अच्छी सुविधा है. मुख्य मार्ग में रात्रि के समय में रौशनी बनी रहे इसके लिए उच्च दबाव की हेलोजन लाइट की व्यवस्था है.
  2. वैकल्पिक मार्ग ( Alternative Route To Vaishno Devi Mandir) लगातार यात्रियों के बढ़ते दबाव और मुख्य मार्ग की कठनाइयों को देखते हुवे, माँ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने 1990 में एक वैकल्पिक रास्ते का निर्माण कार्य शुरू किया, ये रास्ता 1999 में यात्रियों के लिए खोल दिया गया. नए रास्ता मुख्य मार्ग से 500 मीटर छोटा है, साथ ही इस रस्ते में घोड़े इत्यादि के न चलने के कारण यात्रियों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. नया रास्ता अर्धक्वारी से थोडा पहले “इन्द्रप्रस्थ व्यू पॉइंट” से शुरू होता है और माता रानी के मुख्य मंदिर “भवन” तक जाता है. नया रास्ता पुराने की अपेक्षा अधिक चौड़ा और चलने के लिए आसान है. रस्ते में हर जरुरी सुविधा जैसे कि पानी और टॉयलेट इत्यादि की अच्छी सुविधा मौजूद है. जगह जगह पर चाय, काफी और रिफ्रेशमेंट के लिए छोटे- बड़े स्टाल्स भी इस रस्ते में मौजूद है. अर्धक्वारी से महल तक के लिए बैटरी चालित गाड़िया मौजूद होती है. हालाँकि अधिक भीड़ होने पर जल्दी इन गाड़ियों का उपलब्ध हो पाना थोडा मुस्किल जरूर होता है. मगर एडवांस बुकिंग आपकी यात्रा को सुविधा-जनक बना देगी
पैदल यात्रा करने वालों के लिए कटरा से माँ वैष्णो देवी की वास्तविक यात्रा आरम्भ होती है. खड़ी पहाड़ी चढ़ते हुवे यात्री धीरे-धीरे विश्राम करते करते हुवे माता रानी के जयकारों के साथ आगे बढ़ते जाते है. लगभग 6 किलोमीटर की यात्रा तय करने के बाद अर्धक्वारी गुफा आ जाती है. भीड़ कम होने की स्थिति में, यात्री मंदिर को जाते हुवे ही अर्धक्वारी गुफा के दर्शन कर सकते है. भीड़ ज्यादा होने पर कुछ यात्री वापसी के समय भी अर्धक्वारी गुफा में माता रानी के दर्शन करते है. अर्धक्वारी से लगभग 6 किलोमीटर की यात्रा के बाद यात्री सांझीछत नामक स्थान पर पहुचते है. कुछ ही दूरी की यात्रा तय करने के बाद भवन में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.

भवन में पहुच जाने पर  ( At Bhawan | Vaishno Devi Mandir)भवन यानि की  माता वैष्णो देवी के मुख्य मंदिर में प्रवेश के लिए यात्रियों को अलग- अलग ग्रुप में बाँट दिया जाता है. ग्रुप के हिसाब से ही लाइन में लग कर मुख्य मंदिर में प्रवेश करना होता है.  मंदिर में माता वैष्णो देवी के दर्शन के उपरांत यात्री मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित भेरोनाथ मंदिर जाते है और वापस आते हुवे अर्धक्वारी के दर्शन करते हुवे कटरा आ जाते है.

कटरा से मंदिर पहुचने के लिए यात्रा के साधन (Helicopter Service | Vaishno Devi Mandir) 

जो यात्री कटरा से पैदल यात्रा नहीं कर सकते या पैदल नहीं जाना चाहते वो हेलीकाप्टर सेवा का लाभ उठा सकते है. हेलीकाप्टर से यात्रा करना समय के लिहाज से ठीक है. 1005 रूपये खर्च कर आप सांझी छत तक हेलीकाप्टर से यात्रा कर सकते है . आप आने और जाने के लिए हेलीकाप्टर सेवा का लाभ ले सकते है. इसके अलावा घोड़े और पोर्टरों की सहायता से भी माता वैष्णो देवी दर्शन यात्रा तय की जा सकती है. अर्धक्वारी से बैटरी चालित छोटे वाहन से भी भवन के नजदीक तक यात्रा की जा सकती है. हेलोकोप्टर सेवा के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप  माँ वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट देखें.

माँ वैष्णो देवी “यात्रियों के विश्राम के लिए विकल्प (Hotels Near Vaishno Devi Mandir) 

माँ वैष्णो देवी ट्रस्ट ने यात्रियों को परेशानियों से बचाने के लिए अनोको इंतजाम किये है. रुकने के लिए धर्मशालाओं की व्यवस्था भी कटरा से लेकर भवन तक अनेकों जगह पर है. इन धर्मशालाओं में रूककर यात्री विश्राम कर सकते है. इसके अलावा निजी होटलों में भी रुकने की अच्छी व्यवस्था है. इन होटल और धर्मशालाओं की पूर्व बुकिंग करना बेहतर कदम हो सकता है. यात्री चाहे तो जम्मू आकर भी बेहतरीन निजी होटलों में रुक सकते है.

वैष्णो देवी मंदिर के आस- पास अन्य दर्शनीय स्थल (Other Tourist Places Near Vaishno Devi Mandir)

माँ वैष्णो देवी के दर्शन करते हुवे यात्री जम्मू एवं कश्मीर के अन्य धार्मिक और पर्यटक स्थलों पर घूमने की प्लानिंग भी कर सकते है. माँ वैष्णो देवी के नजदीक ही अनेको पर्यटक स्थल जेसे कि जम्मू स्थित रघुनाथ मंदिर, अमर महल आदि स्थान घूमने के लिहाज से बेहतरीन है. यात्री यदि चाहे तो कुछ अधिक दूरी तय कर पर्यटक स्थल “पथनी टॉप” भी घूमने जा सकते है. पथनी टॉप जम्मू से लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर जम्मू एवं कश्मीर रास्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है. इसके अलावा कश्मीर की खूबसूरत वादियों में स्थित पर्यटक स्थल जैसे कि गुलमर्ग, सोनमर्ग आदि की यात्रा का प्लान भी माँ वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा के साथ बनाया जा सकता है.

वैष्णो देवी यात्रा में ध्यान देने योग्य बातें

(Things To Note While Visiting Vaishno Devi Mandir)

  • बल्ड प्रेशर के मरीजों को पैदल यात्रा से परहेज करना चाहिए. वो हेलीकाप्टर या फिर घोड़े और  पोर्टर आदि की सहायता ले कर यात्रा कर सकते है.
  •  यात्रा में अधिक चढ़ाई होने के कारण आपको जी मचलाने सम्बंधित परेशानी आ सकती है. इसलिए पानी और कुछ दवाइयों का साथ होना लाभदायक हो सकता है.
  • यात्रियों को अपने सभी साथियों के साथ मिलकर यात्रा करनी चाहिए.
  • यात्रा के दौरान बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरुरत है.
  • बहुत ज्यादा उम्रदराज यात्रियों को यात्रा के लिए पैदल मार्ग के बजाय अन्य साधनों का इस्तेमाल करना आरामदायक होगा.
  • यात्रियों के यात्रा के दौरान कम से कम सामान साथ में रखना चाहिए. यात्री क्लॉक रूम में अपना सामान जमा करने के उपरांत ही यात्रा आरम्भ करे तो बेहतर होगा.
  • यात्रा के लिए गर्मियों का मौसम ही उचित है. क्योकि सर्दियों में तापमान बहुत कम होता है तथा बरसात में चट्टानों के खिसक जाने का डर बना रहता है.
  • पहाड़ी में खड़ी यात्रा में दौरान छड़ी आपकी यात्रा को सुगम बना सकती है.
  • यात्रा के लिए ट्रेकिंग शूज का इस्तेमाल करना आरामदायक साबित होगा
  • यात्रा का उत्साह और जय माता दी बोलते रहने से यात्रा करना थकन भरा नहीं होगा.

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