“मोहब्बत में नहीं है मंजिल……. कुछ पा जाना” इश्क़ की सच्ची मंजिल है…इंसा का धरती- आसमां हो जाना पिघल जाना…..या कि…
राह में मिलने वाले लोग कुछ पल के ही साथी होंगे अंतहीन बुग्यालों के भटकते पथिकों को रास्ता बताकर उनके…
उस दिन मैं सिर्फ मिला ही नहीं था मैं खुला भी था जैसे लाटरी खुलती है किसी की सब कुछ…
एक बूढ़ा इंतजार में बैठा है कि मौका मिलते ही मुख्यमंत्री बनूँगा… करना कुछ नहीं होता मुख्यमंत्री बनने के लिए…