सब्र फल और भांग

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एक बूढ़ा इंतजार में बैठा है
कि मौका मिलते ही मुख्यमंत्री बनूँगा…
करना कुछ नहीं होता मुख्यमंत्री बनने के लिए
आँख – कान खुले रखो….. चील की तरह ताक में रहो
मौका मिले तो नोचने के लिए दौड़ पड़ो
बाकी टाइम बकैती करते रहो…..

एक बूढ़ा जो सब्र का मीठा फल भोग रहा है
प्रधान सेवादार है ….
उतरना नहीं चाहता वो पेड़ से
उसे पता है…. पूरा बाग नशे में रहता है….
उसे बस भांग का जुगाड़ करना है
और वो स्प्रे मशीन दुरुस्त रहे …..
जिससे भांग हवा में उड़ाई जा सके
धर्म और जात के कीटों से
भरे बगीचे में उसकी भांग बहुत काम करती है

इधर नौजवान भी इंतजार करते – करते..
अब खुद इंतजार हो लिए है
करना क्या करना है …जुगाड़ में रहना है
जैसे ही जुगाड़ भिड़े चिपक जाओ
करना कुछ नहीं है बस जुगाड़ से चिपकना है
टैलंट होता तो मुख्यमंत्री के लिए अप्लाई करते
वो है नहीं….जुगाड़ है ….तो इंतजार कर रहे है ….

टीवी वालों का भी बराबर स्टेक है देश की चुसाई में
बाबा और एंकर मिलकर करते है दुकानदारी
भांग बेचते है ….. भांग ही उड़ाते भी है
अपनी पब्लिक तो हरफनमौला है ही
जब मन आये थाली पिटवा लो …
चुनाव आये तो बटन दबवा लो
होस आये तो बिल थमा दो….

    बाकीस्टेकहोल्डर भी मजे मै है…..
और बटन दबाने वाले नशे मै है

इसी तरह के मजेदार कंपोनेंट्स से मिलकर बना है अपना देश
बीमारी आये तो गोबर खा लो…. युद्ध हो तो पुतला जला लो
जय श्री ….का नारा बोलो ..और याद रखो बन्दे गान

जोर से बोलो…… मेरा भारत महान


हिन्दीवाल के लिए ये पंक्तिया रोहित गड़कोटी ने लिखी हैं.  अल्मोड़ा (उत्तराखंड) में रहते है। हिन्दीवाल ब्लॉग

poem by rohit garkoti

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